व्रत में बहुतायत से खाया जाने वाला साबूदाना सेहत के लिए कितना फायदेमंद; स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने साझा किए जरूरी सुझाव और सावधानियां

व्रत में बहुतायत से खाया जाने वाला साबूदाना सेहत के लिए कितना फायदेमंद; स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने साझा किए जरूरी सुझाव और सावधानियां
नई दिल्ली/लाइफस्टाइल: भारतीय संस्कृति में व्रत-त्योहारों के दौरान खान-पान का विशेष ध्यान रखा जाता है, और शारदीय नवरात्रि जैसे पावन अवसरों पर साबूदाना उपवास के दौरान सबसे पसंदीदा खाद्य पदार्थों में शुमार रहता है। फलाहार के रूप में साबूदाना खिचड़ी, खीर या वड़े के रूप में लगभग हर घर में बड़े चाव से खाया जाता है। उपवास के दिनों में लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने और पेट को भरा हुआ रखने के लिए लोग इसका सेवन करते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पोषण वैज्ञानिकों का मानना है कि साबूदाना ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत होने के बावजूद इसके सेवन के तरीकों और मात्रा को लेकर कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक होता है, ताकि शरीर को पूरा पोषण मिल सके और किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी असुविधा न हो।

पोषण विशेषज्ञों के अनुसार साबूदाना मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट और स्टार्च से भरपूर होता है, जो उपवास के दौरान शरीर को त्वरित ऊर्जा (इंस्टेंट एनर्जी) प्रदान करने का काम करता है। यही कारण है कि व्रत के लंबे घंटों के दौरान कमजोरी या थकान महसूस होने पर साबूदाना खाने से तुरंत ताजगी का अहसास होता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि चूंकि साबूदाना में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अत्यधिक और प्रोटीन, फाइबर तथा अन्य विटामिनों की मात्रा कम होती है, इसलिए इसे केवल अकेले या अत्यधिक मात्रा में खाने से बचना चाहिए। विशेषकर मधुमेह (डाइबिटीज) से पीड़ित लोगों या वजन नियंत्रित करने वाले व्यक्तियों को साबूदाना का सेवन करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह रक्त में शर्करा के स्तर को तेजी से बढ़ा सकता है।

साबूदाना के स्वास्थ्य लाभों को सुरक्षित रखते हुए इसे और अधिक पौष्टिक बनाने के लिए विशेषज्ञ इसे पकाने के तरीकों में बदलाव करने की सलाह देते हैं। उपवास के दौरान साबूदाना बनाते समय अत्यधिक मात्रा में घी, तेल या रिफाइंड का उपयोग करने के बजाय, इसे भुनी हुई मूंगफली, हरी मिर्च, करी पत्ता और भरपूर मात्रा में हरी सब्जियों के साथ तैयार किया जाना चाहिए। मूंगफली मिलाने से इसमें प्रोटीन और हेल्दी फैट्स की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे शरीर को संतुलित पोषण मिलता है और पाचन तंत्र पर भी अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता है। इसके अलावा, साबूदाना को पकाने से पहले पानी में अच्छी तरह भिगोना जरूरी है ताकि वह अंदर तक नरम हो जाए और आसानी से पच सके।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि व्रत के दौरान साबूदाना का सेवन पूरी तरह से सुरक्षित और ऊर्जावान बनाए रखने वाला है, बशर्ते इसे सही मात्रा और संतुलित सामग्री के साथ पकाया जाए। उपवास के दौरान केवल एक ही प्रकार के भोजन पर निर्भर रहने के बजाय फलों, मखाने, सिंघाड़े के आटे और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों को भी अपनी आहार शैली में शामिल करना चाहिए। इन छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर लोग शारदीय नवरात्रि या अन्य व्रतों के दौरान अपनी सेहत और ऊर्जा के स्तर को पूरी तरह बरकरार रख सकते हैं, जिससे आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ शारीरिक फिटनेस भी बनी रहती है।