अफगानिस्तान में तालिबान का नया क्रूर फरमान: बाल विवाह को दी कानूनी मंजूरी
नई दिल्ली। अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज तालिबान शासन ने एक बार फिर मानवाधिकारों और विशेषकर महिलाओं व बच्चियों के अधिकारों को ताक पर रखते हुए एक नया और बेहद विवादित पारिवारिक कानून (Family Law) लागू कर दिया है। इस नए कानून के तहत देश में बाल विवाह को कानूनी रूप से वैध बनाने और तलाक की प्रक्रियाओं को महिलाओं के लिए अत्यंत जटिल व दमनकारी बनाने के प्रावधान शामिल किए गए हैं। तालिबान के इस कदम ने न केवल अफगान समाज के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने इस कानून की कड़ी निंदा करते हुए इसे महिलाओं के बुनियादी हक-अधिकारों पर अब तक का सबसे क्रूर और बड़ा प्रहार बताया है, जिससे देश में कम उम्र की बच्चियों के शोषण और जबरन शादियों का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
इस कानून के लागू होने के बाद अफगानिस्तान के भीतर महिलाओं की स्थिति और भी बदतर होने की आशंका जताई जा रही है, जो पहले से ही तालिबान के कड़े प्रतिबंधों जैसे शिक्षा और नौकरी पर रोक का सामना कर रही हैं। नए नियमों के अनुसार, जहाँ पुरुषों को शादी और तलाक के मामलों में असीमित अधिकार दे दिए गए हैं, वहीं महिलाओं के लिए कानूनी मदद या घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने के सारे रास्ते लगभग बंद कर दिए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र और दुनिया भर के कई प्रमुख देशों ने तालिबान के इस दमनकारी नीति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि इस तरह के कानून न केवल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का खुला उल्लंघन हैं, बल्कि यह अफगानिस्तान को आधुनिक युग से ढकेलकर वापस एक ऐसे अंधकारमय दौर में ले जाएंगे जहाँ आधी आबादी को पूरी तरह से दबाकर रख दिया जाएगा।

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