तनाव प्रबंधन पर कार्यशाला : पुलिस प्रक्षिणार्थियों को मिली मानसिक सेहत की ट्रेनिंग
ब्रीदिंग एक्सरसाइज, डिजिटल डिटॉक्स और बेहतर नींद के बताए गए तरीके
रायपुर। पुलिस सेवा में तनाव के बीच बेहतर निर्णय क्षमता और संवेदनशीलता बनाए रखने के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ रहना जरूरी है। इसी उद्देश्य से विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह-2026 के अवसर पर गुरुवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस राज्य पुलिस अकादमी, चंदखुरी में पुलिस प्रशिक्षणार्थियों के लिए तनाव प्रबंधन एवं मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में पुलिस सेवा के दौरान तनाव के प्रमुख कारणों, तनाव के शुरुआती लक्षणों की पहचान और उनके व्यावहारिक प्रबंधन पर चर्चा की गई। प्रशिक्षणार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रखने के लिए वैज्ञानिक और आसान तकनीकों का अभ्यास भी कराया गया।
तनाव पहचानने से लेकर संभालने तक का प्रशिक्षण
कार्यशाला में डायाफ्रामैटिक ब्रीदिंग, फाइव-सेंस ग्राउंडिंग, थॉट क्लाउड और सोच में सुधार जैसी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही डिजिटल डिटॉक्स, स्लीप हाइजीन और साइकोलॉजिकल फर्स्ट ऐड के बारे में भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि तनाव को शुरुआती स्तर पर पहचानकर सही तरीके से प्रबंधित किया जाए तो इसके नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कार्यशाला का संचालन रायपुर मनोपचार (PGIBAMS) के एक फैकल्टी सदस्य और एम.फिल. क्लिनिकल साइकोलॉजी के 10 विद्यार्थियों की टीम ने संयुक्त रूप से किया।
प्रभावी पुलिसिंग के लिए मानसिक स्वास्थ्य जरूरी
डॉ. मनोज के. पांडेय ने कहा कि पुलिसकर्मियों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावी पुलिसिंग, बेहतर निर्णय क्षमता और संवेदनशील जनसेवा का महत्वपूर्ण आधार है। तनाव को समय रहते पहचानकर उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना जरूरी है।
कार्यशाला का मुख्य संदेश रहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ पुलिस बल ही अधिक सजग, संतुलित, संवेदनशील और प्रभावी तरीके से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकता है।
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