पुलिस ने 4 आरोपियों को किया गिरफ्तार
सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से अंधविश्वास और अमानवीयता की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां टोना-टोटका (टोनही) के संदेह में एक महिला के साथ सरेराह दरिंदगी की गई। आरोपियों ने महिला के कपड़े फाड़कर उसे निर्वस्त्र कर दिया और पेड़ से बांधकर बेरहमी से उसकी पिटाई कर दी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। पीड़िता की शिकायत पर सूरजपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में शामिल 4 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
अंधविश्वास के जाल में अमानवीयता, महिला को पेड़ से बांधकर पीटा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सूरजपुर जिले के संबंधित गांव में आरोपी पक्ष और पीड़िता के बीच काफी समय से तनाव चल रहा था। आरोपियों ने महिला पर घर में बीमारी और अनिष्ट फैलाने का झूठा आरोप लगाते हुए उस पर जादू-टोना करने का संदेह जताया। इसी अंधविश्वास के अंधेपन में आरोपियों ने पीड़िता के साथ पहले गाली-गलौज की और फिर उग्र होकर उसे जबरन घसीटते हुए एक पेड़ के पास ले गए। वहां आरोपियों ने महिला के साथ अभद्रता करते हुए उसके कपड़े तार-तार कर दिए और पेड़ से बांधकर डंडों व लात-घूसों से जमकर पिटाई की। महिला के शोर मचाने पर जब तक आसपास के लोग एकत्र होते, आरोपी उसे गंभीर हालत में छोड़कर मौके से फरार हो गए।
पीड़िता ने थाने पहुंचकर बताई आपबीती, पुलिस ने 4 आरोपियों को दबोचा
इस भयावह घटना के बाद सदमे में आई पीड़िता ने परिजनों की मदद से स्थानीय थाने पहुंचकर आपबीती सुनाई और आरोपियों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई। महिला अपराध और अंधविश्वास से जुड़ी इस घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने तुरंत गांव में दबिश देकर घटना में शामिल 4 मुख्य आरोपियों को धर दबोचा। आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ टोनही अत्याचार निवारण अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश करने की तैयारी की जा रही है।
21वीं सदी में भी अंधविश्वास के नाम पर महिलाओं के साथ होने वाली यह बर्बरता समाज पर एक गंभीर सवाल उठाती है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून को अपने हाथ में लेने, अंधविश्वास फैलाने और महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में टोनही प्रताड़ना और अंधविश्वास जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए पुलिस द्वारा जन-जागरूकता अभियान भी चलाने की बात कही गई है, ताकि भविष्य में ऐसी अमानवीय घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।