ध्वनि प्रदूषण पर सख्त होगा कानून, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी प्रगति रिपोर्ट; त्योहारों से पहले नए नियमों की तैयारी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार नए और कड़े नियम लागू करने की तैयारी में है। तेज डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों से होने वाले शोर को लेकर हाईकोर्ट में स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में संशोधन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। हाईकोर्ट ने सरकार को अगली सुनवाई में संशोधन की प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि त्योहारों का मौसम नजदीक है, ऐसे में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है। इस पर राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मौजूदा कानून को अधिक प्रभावी बनाने के लिए व्यापक संशोधन किए जा रहे हैं और जल्द ही नया मसौदा अंतिम रूप ले लेगा।
अंतिम चरण में संशोधन का मसौदा
सरकार की ओर से दायर शपथपत्र में बताया गया कि कोलाहल नियंत्रण अधिनियम में संशोधन के लिए गठित ड्राफ्ट कमेटी ने 11 मई, 2 जून, 8 जून और 15 जून 2026 को लगातार बैठकें कीं। इन बैठकों में विभिन्न हितधारकों और मैदानी अधिकारियों से प्राप्त सुझावों पर विचार करते हुए प्रस्तावित संशोधन की धारा-दर-धारा समीक्षा की गई और आवश्यक बदलाव किए गए।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधानसभा में आएगा विधेयक
गृह विभाग के अनुसार, ड्राफ्ट कमेटी द्वारा अंतिम रूप दिए जाने के बाद प्रस्ताव को राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद संशोधन विधेयक को विधानसभा में पेश किया जाएगा। विधेयक पारित होने के बाद नया कानून पूरे प्रदेश में लागू होगा।
वर्तमान कानून को बताया गया कमजोर
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि वर्तमान कानून प्रभावी साबित नहीं हो रहा है। उनका कहना था कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर केवल 500 से 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है, जबकि साउंड सिस्टम जब्त करने या अन्य सख्त कार्रवाई का प्रावधान प्रभावी रूप से लागू नहीं हो रहा है। इसके कारण ध्वनि प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ रही है।
हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि नए कानून को लागू करने की दिशा में अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई में राज्य सरकार को संशोधन प्रक्रिया की ताजा स्थिति से अदालत को अवगत कराना होगा।
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