हंसी-खुशी और सहमति से महानदी का पानी बांट लेंगे छत्तीसगढ़ और ओडिशा
तीन महीनों में दशकों पुराना विवाद दूर होगा
रायपुर (चैनल इंडिया)। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच वर्षों से चले आ रहे महानदी जल विवाद के समाधान को लेकर बड़ी उम्मीद जगी है। नई दिल्ली से लौटने के बाद स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ऐलान किया कि दोनों राज्यों के बीच लंबित महानदी जल विवाद का समाधान अब से तीन माह के भीतर निकल सकता है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में हुई महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) को दोनों राज्यों के हितों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने के लिए अधिकृत कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र और दोनों राज्यों में डबल इंजन की सरकार होने के कारण बेहतर तालमेल और समन्वय स्थापित हुआ है, जिससे वर्षों पुराने इस गंभीर विवाद के जल्द और सकारात्मक समाधान की संभावनाएं काफी मजबूत हुई हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी तीन महीनों के भीतर इस दिशा में ठोस परिणाम सामने आएंगे, जिससे दोनों राज्यों के नागरिकों को राहत मिलेगी।
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी के पानी के उपयोग और बैराज निर्माण को लेकर असहमतियां शुरू हुईं, जो आगे चलकर बड़े अंतर्राज्यीय विवाद में बदल गईं। वर्ष 2016-2018 का दौर: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महानदी बेसिन में विभिन्न औद्योगिक और सिंचाई परियोजनाओं के तहत बैराज निर्माण किए जाने पर ओडिशा सरकार ने आपत्ति जताई और पानी रोकने का आरोप लगाया। अब केंद्र और दोनों राज्यों की डबल इंजन सरकारों के बीच हुए समन्वय तथा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की उपस्थिति में हुई हालिया बैठक के बाद, केंद्रीय जल आयोग को अगले तीन महीनों के भीतर इस विवाद का अंतिम समाधान निकालने के लिए अधिकृत किया गया है।
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