वन तस्करी के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़: तीन आरोपी गिरफ्तार, कई राज्यों तक फैला था अवैध कारोबार
रायगढ़। रायगढ़ जिले में वन क्षेत्र से खैर और तेंदू प्रजाति की लकड़ियों की अवैध कटाई और तस्करी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पुलिस और वन विभाग ने खुलासा किया है। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है, जबकि एक अन्य आरोपी फरार बताया जा रहा है।
जांच में सामने आया कि यह गिरोह धरमजयगढ़, घरघोड़ा और तमनार वन क्षेत्रों में ग्रामीणों को पैसों का लालच देकर पेड़ों की अवैध कटाई कराता था। इसके बाद लकड़ियों को रायगढ़ के गढ़उमरिया स्थित एक गोदाम में जमा किया जाता था। आरोप है कि वहां लकड़ियों की प्रोसेसिंग के बाद उन्हें फर्जी दस्तावेजों के जरिए दूसरे राज्यों में भेजा जाता था।
फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट का इस्तेमाल करने का आरोप
वन विभाग की कार्रवाई के दौरान लकड़ियों के परिवहन से जुड़े ट्रांसपोर्ट परमिट भी मिले थे। जांच में इन दस्तावेजों पर संबंधित वन अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं पाए गए, जिससे उनके फर्जी होने की आशंका जताई गई। इसके बाद मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई।
गोदाम से बड़ी मात्रा में लकड़ी जब्त
वन विभाग ने मई 2025 में गढ़उमरिया स्थित गोदाम पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान ट्रक में लदे तेंदू के लट्ठों के अलावा गोदाम से खैर और तेंदू प्रजाति की लकड़ियां, जलाऊ लकड़ी, कटर मशीन, वजन मशीन, कुल्हाड़ी और हथौड़ा समेत अन्य सामान जब्त किया गया था।
तीन आरोपी गिरफ्तार, एक फरार
मामले में विशेष जांच टीम ने रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, भारतीय वन अधिनियम और संगठित अपराध से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
वहीं, वाहन मालिक भरत कुमार मेश्राम फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है। मामले की जांच अभी जारी है और सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में सामने आए इस मामले ने अंतरराज्यीय स्तर पर फैले कथित अवैध लकड़ी कारोबार की ओर इशारा किया है। जांच एजेंसियां अब लकड़ियों के स्रोत, परिवहन नेटवर्क और इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में जानकारी जुटा रही हैं।
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