काशी में मृत्यु भी मंगलप्रद है : इंदुभवानंद तीर्थ
रायपुर। श्री शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला रायपुर में जारी चातुर्मास प्रवचन के क्रम को गति देते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ.इंदुभवानंद तीर्थ महाराज ने बताया कि काशी में मृत्यु भी मंगल प्रद होती है। शिव कथा के प्रसंग में महाराज ने बताया कि संसार में चार चीजों में ही सार निहित है। मानव शरीर प्राप्त करने का सबसे बड़ा लाभ काशी में वास होना चाहिए तथा साधुओं का साथ प्राप्त होना चाहिए एवं गंगा की सन्निधि प्राप्त होना चाहिए तथा सदा सर्वदा शिवपूजन का अवसर प्राप्त होना चाहिए। इन्हीं चार चीजों की काशी में प्राप्ति होती है। यहां मृत्यु की प्राप्ति भी मंगलप्रद है। काशी संसार का सार है अन्यथा संसार निःसार है। काशी में बस प्राप्त होने से जिओ को मुक्ति सहज ही प्राप्त हो जाती है भगवान शिव काशी में मुक्ति का नक्षत्र चलते हैं और मुक्तिधाम करते समय विचार नहीं करते हैं कि जीव कितना पापी है जो भी काशी में निवास करता है उसको भगवान मृत्यु काल में उसके कान में तारक मंत्र देकर के उसको मुक्त कर देते हैं जिसकी संसार में कहीं गति नहीं है उसकी गति काशी ही है। काशी पाप की असि (तलवार) है। काशी में निवास करने से जीव पाप मुक्त हो जाता है काशी में रहने वाले को सदा सर्वदा भगवान शिव की कृपा तथा गंगा जी की सन्निधि प्राप्त होती है। गंगा के सानिध्य के कारण प्राणी काशी में पाप मुक्त हो जाता है। काशी शिव की नगरी है काशी में सदा सर्वदा शिव जी के दर्शन प्राप्त होने के कारण व्यक्ति शिवजी की कृपा को प्राप्त कर लेता है। काशी भगवान शिव के त्रिशूल में विराजमान है।अतः प्रलय काल में भी काशी का क्षय नहीं होता है। काशी की निवास की तो बात छोड़ी है काशी के दर्शन करने मात्र से व्यक्ति पाप मुक्त हो जाता है।
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