28 सितम्बर पंचांग: जानें तिथि, नक्षत्र, राहुकाल और शुभ मुहूर्त; समझें आज के दिन का धार्मिक महत्व और पूजा विधान

28 सितम्बर पंचांग: जानें तिथि, नक्षत्र, राहुकाल और शुभ मुहूर्त; समझें आज के दिन का धार्मिक महत्व और पूजा विधान

नई दिल्ली/रायपुर: 28 सितम्बर का दिन सनातन परंपरा में धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-अनुष्ठान, यात्रा या नए व्यापारिक सौदे की शुरुआत से पूर्व पंचांग की गणना का विचार करना अति आवश्यक और फलदायी माना गया है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, पंचांग के पांच मुख्य अंगों—तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण की सटीक गणना व्यक्ति को शुभ समय का चयन करने और दिनभर के कार्यों को बिना किसी विघ्न-बाधा के संपन्न करने में मदद करती है।

ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और तिथि का विशेष महत्व

28 सितम्बर को पंचांगीय गणना के अनुसार सूर्योदय के साथ ही विशिष्ट तिथि और नक्षत्र का शुभ संयोग निर्मित हो रहा है। इस दिन ग्रहों और नक्षत्रों की चाल से कई कल्याणकारी योग बन रहे हैं, जो धर्म-कर्म और मांगलिक कार्यों के लिए बेहद अनुकूल माने जा रहे हैं। चंद्र देव का विभिन्न राशियों में गोचर और नक्षत्रों का सकारात्मक प्रभाव साधकों को मानसिक एकाग्रता, कार्यों में सफलता और आध्यात्मिक शांति प्रदान करेगा।

अभिजित मुहूर्त और आज के शुभ समय

किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत के लिए दिन का शुभ मुहूर्त अत्यंत फलदायी माना गया है। प्रातः काल का ब्रह्म मुहूर्त ईश्वर की आराधना, ध्यान, योग और अध्ययन के लिए श्रेष्ठ समय रहेगा। इसके अलावा, दोपहर के समय बनने वाले अभिजित मुहूर्त के दौरान किसी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत करना, नया वाहन या आभूषण खरीदना तथा महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि अभिजित मुहूर्त में शुरू किए गए कार्यों में सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

राहुकाल और दिशाशूल का रखें विशेष ध्यान

पंचांग में शुभ समय की जानकारी के साथ-साथ अशुभ समय का विचार करना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि किसी भी संभावित अनहोनी या बाधा से बचा जा सके। 28 सितम्बर को दिन के दौरान राहुकाल की विशेष अवधि रहेगी। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार, राहुकाल के दौरान किसी भी नए, मांगलिक या बड़े वित्तीय जोखिम वाले कार्य को शुरू करने से बचना चाहिए। इसके साथ ही, यात्रा पर निकलने से पूर्व दिशाशूल का विशेष ध्यान रखें और यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो धार्मिक नियमों व उपायों का पालन करके ही घर से प्रस्थान करें।

28 सितम्बर के दिन को और अधिक मंगलकारी बनाने के लिए प्रातः काल स्नान के बाद भगवान सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें। जल में थोड़ा सा सिंदूर, अक्षत और लाल पुष्प मिलाकर सूर्यदेव को अर्घ्य देने से मान-सम्मान और आरोग्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही, प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश और भगवान शिव की आराधना करने तथा जरूरतमंदों को अपनी सामर्थ्य अनुसार दान देने से ग्रह दोषों का निवारण होता है और घर-परिवार में सुख, समृद्धि व शांति का वास बना रहता है।