रायपुर (चैनल इंडिया)। मानसून सत्र के तीसरे दिन आज कांग्रेस ने नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में विधानसभा में काम रोको (स्थगन) प्रस्ताव लाकर तुरंत चर्चा की मांग की, जिसे अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद कांग्रेस ने सदन में जबरदस्त प्रदर्शन किया। लगातार नारेबाजी करते हुए कांग्रेस विधायक गर्भगृह में पहुंच गए, जिसके बाद वे स्वमेव निलंबित हो गए।
सदन में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि 29 और 30 जून को बुलडोजर चलाकर 85 गरीब परिवारों के मकान तोड़ दिए गए। इनमें से कई मकान प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत बने थे, जहाँ बिजली, सडक़ और पानी जैसी सरकारी सुविधाएँ पहले से थीं। विपक्ष का आरोप है कि इस कार्रवाई में लोगों के घरेलू सामान, बच्चों की किताबें और राशन नष्ट हो गए, जो प्राकृतिक न्याय और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। स्थानीय सांसद द्वारा बारिश के मौसम में मकान न तोडऩे के आश्वासन के बावजूद यह कार्रवाई की गई। विपक्ष ने यह भी कहा कि प्रभावित परिवारों को सेक्टर-30, नवा रायपुर में जो वैकल्पिक आवास दिए जा रहे हैं, वे बहुत छोटे हैं और वहाँ बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने आरोप लगाया कि विधायक कॉलोनी बनाने के लिए गरीबों के मकान तोड़े गए हैं।
इस पर भाजपा सदस्य अजय चंद्राकर ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि विधायक कॉलोनी निर्माण से संबंधित कोई भी दस्तावेज है, तो उसे सदन के पटल पर (सामने) रखा जाना चाहिए। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने स्पष्ट किया कि यह पूरी कार्रवाई पूरी तरह से वैधानिक और नियमानुसार की गई है। उन्होंने बताया कि अतिक्रमण की शिकायत मिलने पर अतिरिक्त तहसीलदार ने इसकी जांच की थी। जांच में अवैध कब्जा पाए जाने के बाद वर्ष 2025 में ही बेदखली (अतिक्रमण हटाने) का आदेश पारित किया गया था, जिसके बाद 28 जून को कार्रवाई की गई। मंत्री ने कहा कि कब्जाधारियों को कार्रवाई से पहले अपना सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था और किसी के भी घरेलू सामान को नुकसान नहीं पहुँचाया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों के रहने के लिए सेक्टर-30, नवा रायपुर में फ्लैट उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने विपक्ष के इस दावे को भी खारिज किया कि यह कार्रवाई बारिश के दौरान की गई थी। राजस्व मंत्री का जवाब सुनने के बाद अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कांग्रेस के काम रोको प्रस्ताव को अग्राह्य (अस्वीकार) घोषित कर दिया। इससे नाराज होकर कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंच गए। विधानसभा के नियमों के तहत गर्भगृह में प्रवेश करने के कारण नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित कांग्रेस के सभी 34 विधायक स्वत: (अपने आप) निलंबित हो गए।