नई दिल्ली/लाइफस्टाइल: रसोई का स्वाद और खुशबू बढ़ाने वाला लहसुन न केवल सेहत के लिए बेहद गुणकारी है, बल्कि भारतीय व्यंजनों का एक अहम हिस्सा भी है। बाजार में कई बार लहसुन के दाम काफी बढ़ जाते हैं या रासायनिक खाद से उगे लहसुन मिलते हैं। ऐसे में अगर आप बिना किसी कीटनाशक और रसायन के घर पर ही ताजा लहसुन पाना चाहते हैं, तो यह काम बेहद आसान है। सही तकनीक और थोड़ी सी देखभाल की मदद से आप अपने घर की बालकनी या छत पर रखे गमले में ही जैविक और सेहतमंद लहसुन उगा सकते हैं।
सही कलियों का चयन और गमले व मिट्टी की तैयारी
घर में लहसुन उगाने के लिए सबसे पहले अपनी रसोई में मौजूद या बाजार से लाए गए स्वस्थ और बड़े आकार के लहसुन की कलियों का चुनाव करें। लहसुन की गांठ में से केवल मोटी और बेदाग कलियों को ही अलग करें, क्योंकि इन्हीं से पौधा तेजी से विकसित होता है। इसके बाद एक ऐसा गमला या ग्रो बैग चुनें जिसकी गहराई कम से कम 8 से 10 इंच हो और उसके तल में जल निकासी के लिए छेद बना हो। लहसुन की अच्छी पैदावार के लिए जल-निकासी वाली भुरभुरी व उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है। इसके लिए सामान्य मिट्टी में वर्मीकंपोस्ट या गोबर की पुरानी खाद और थोड़ी सी रेत मिलाकर एक बेहतरीन पॉटिंग मिक्स तैयार करें।
रोपाई की सही विधि और धूप व पानी का संतुलन
तैयार मिट्टी में लहसुन की कलियों को रोपने के लिए लगभग दो से तीन इंच गहरा गड्ढा बनाएं। कलियों को रोपते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उनका नुकीला सिरा ऊपर की ओर और चौड़ा हिस्सा नीचे मिट्टी में रहे। दो कलियों के बीच कम से कम तीन से चार इंच की दूरी बनाकर रखें ताकि लहसुन की गांठ को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिले। रोपाई के बाद मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए हल्का पानी छिड़कें। ध्यान रहे कि गमले में अत्यधिक जलभराव न हो, अन्यथा कलियां सड़ सकती हैं। लहसुन के पौधे को बेहतर विकास के लिए प्रतिदिन कम से कम पांच से छह घंटे की सीधी धूप मिलना अनिवार्य है, इसलिए गमले को बालकनी या छत के ऐसे स्थान पर रखें जहां अच्छी धूप आती हो।
पौधे की देखभाल और लहसुन निकालने का सही समय
लहसुन की फसल को पूरी तरह तैयार होने में आमतौर पर चार से पांच महीने का समय लगता है। इस दौरान गमले में समय-समय पर नमी की जांच करते रहें और आवश्यकतानुसार ही पानी दें। बीच-बीच में गोबर की खाद या जैविक खाद देने से पौधों का विकास तेजी से होता है। जब लहसुन के पौधे की ऊपरी पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगें, तो यह संकेत होता है कि मिट्टी के नीचे लहसुन की गांठें पूरी तरह से पककर तैयार हो चुकी हैं। इस अवस्था में पानी देना बंद कर दें और दो-तीन दिन बाद मिट्टी को धीरे से खोदकर लहसुन की गांठें बाहर निकाल लें।
गमले में लहसुन उगाने की यह प्रक्रिया न केवल बेहद आसान है, बल्कि इससे आपको बिना किसी हानिकारक रसायन के शुद्ध और खुशबूदार लहसुन भी प्राप्त होता है। घर की छोटी सी बालकनी में उगे इस ऑर्गेनिक लहसुन का स्वाद और गुण बाजार के लहसुन की तुलना में कहीं अधिक लाजवाब होता है। थोड़ी सी देखभाल से आप अपनी दैनिक रसोई की जरूरतों के लिए हमेशा ताजा लहसुन घर पर ही प्राप्त कर सकते हैं।