स्कूल के प्राचार्यों को भी अब रोज दो पीरियड्स पढ़ाना जरूरी, प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियों के साथ बढ़ा दायित्व

स्कूल के प्राचार्यों को भी अब रोज दो पीरियड्स पढ़ाना जरूरी, प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियों के साथ बढ़ा दायित्व
रायपुर (चैनल इंडिया)। प्रदेश के  सरकारी हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में प्राचार्यों की भूमिका को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है। अब प्राचार्यों को प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियों के साथ प्रतिदिन कम से कम दो कालखंड अध्यापन करना होगा। विभाग ने नौ सितंबर को जारी आदेश में सभी शासकीय हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों के पदीय कार्यों एवं दायित्वों को स्पष्ट करते हुए इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा है कि कोताही करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। 
नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्राचार्य अब केवल विद्यालय के प्रशासनिक प्रमुख की भूमिका में नहीं रहेंगे। उन्हें विद्यालय से जुड़े सभी प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों का निर्वहन करने के साथ आवश्यकता के अनुसार कम से कम दो कालखंड प्रतिदिन पढ़ाना होगा। इसका असर स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। प्राचार्यों की कक्षा में नियमित मौजूदगी से विद्यार्थियों के साथ उनका सीधा संवाद बढ़ेगा। साथ ही प्राचार्य स्वयं कक्षा में जाकर पढ़ाई की स्थिति, विद्यार्थियों की सहभागिता और शैक्षणिक वातावरण को अधिक करीब से देख सकेंगे।
विभाग ने स्कूल भवन में उपलब्ध कक्षों के उपयोग को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। भवन के ड्राइंग-डिजाइन के अनुसार प्राचार्य, लिपिक और स्टाफ के लिए निर्धारित कक्षों में ही उनके बैठने की व्यवस्था होगी। इन निर्धारित कक्षों के अलावा अध्यापन कक्षों का इस्तेमाल प्राचार्य, लिपिक या स्टाफ  के बैठने के लिए नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा विद्यालय में मौजूद बड़े कक्षों का उपयोग विद्यार्थियों के अध्ययन-अध्यापन के लिए करने को कहा गया है।