अक्षत अग्रवाल हत्याकांड में पूर्व कर्मचारी को उम्रकैद, 33 गवाहों की गवाही के आधार पर कोर्ट ने सुनाया फैसला
अंबिकापुर। बहुचर्चित अक्षत अग्रवाल हत्याकांड में सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने आरोपी संजीव मंडल उर्फ भानू बंगाली को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आर्म्स एक्ट की धारा 25-27 के तहत भी आरोपी को 5 वर्ष के कारावास की सजा दी है।
मामला अगस्त 2024 का है। अंबिकापुर के मनेंद्रगढ़ रोड निवासी अंबिका स्टील संचालक महेश केडिया के 23 वर्षीय बेटे अक्षत अग्रवाल की 20 अगस्त 2024 की शाम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अगले दिन 21 अगस्त को उसका शव शहर से लगे चठिरमा जंगल में उसकी ही कार से बरामद हुआ था। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
शरीर पर मिले थे तीन गोलियों के निशान
पुलिस जांच के दौरान अक्षत अग्रवाल के शरीर पर गोली लगने के तीन निशान मिले थे। मामले में पुलिस ने अंबिका स्टील के पूर्व कर्मचारी संजीव मंडल उर्फ भानू बंगाली को गिरफ्तार किया था।
आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने तीन पिस्टल और 31 कारतूस बरामद किए थे। इसके अलावा 50 हजार रुपए नकद, अक्षत की सोने की चेन, ब्रेसलेट और अंगूठी भी बरामद किए गए थे।
आरोपी ने दिया था अलग दावा
गिरफ्तारी के बाद संजीव मंडल ने पुलिस के सामने घटना को लेकर अलग दावा किया था। आरोपी का कहना था कि अक्षत ने ही उसकी हत्या की सुपारी दी थी। उसके मुताबिक, हत्या के बाद उसे नकदी के साथ अक्षत की सोने की चेन, ब्रेसलेट और अंगूठी देने की बात कही गई थी।
आरोपी ने यह भी दावा किया था कि घटना के समय अक्षत कार की ड्राइविंग सीट पर बैठा था। उसने पहली गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन पिस्टल नहीं चली। इसके बाद अक्षत ने खुद ट्रिगर दबाया, जिससे उसके सीने में गोली लगी। आरोपी के अनुसार, इसके बाद उसने दो और गोलियां चलाईं।
नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट भी हुआ
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी का नार्को टेस्ट, पॉलीग्राफ टेस्ट और ब्रेन मैपिंग भी कराया था। जांच में घटनास्थल पर आरोपी और मृतक के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की मौजूदगी की पुष्टि नहीं होने की बात सामने आई।
करीब दो साल चली सुनवाई
अतिरिक्त लोक अभियोजक विनोद कुमार दुबे के अनुसार, मामले की सुनवाई सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत में हुई। करीब दो साल चली सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों और जवानों, फॉरेंसिक विशेषज्ञों, चिकित्सकों, परिजनों और मृतक के दोस्तों समेत कुल 33 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
इन साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने संजीव मंडल को BNS की धारा 103(1) के तहत हत्या का दोषी ठहराया और आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 25-27 के तहत 5 वर्ष के कारावास की सजा भी दी गई।
आरोपी करीब दो साल से जेल में बंद है।
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