9 अक्टूबर पंचांग: शुक्रवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की तिथि; जानिए आज के शुभ मुहूर्त, राहुकाल और धार्मिक महत्व
नई दिल्ली/रायपुर: सनातन धर्म में किसी भी नए कार्य की शुरुआत, धार्मिक अनुष्ठान, यात्रा या वित्तीय निवेश से पूर्व दैनिक पंचांग का अध्ययन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। पंचांग के माध्यम से दिन के शुभ-अशुभ समय, तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की चाल का सटीक ज्ञान प्राप्त होता है, जिससे कार्यों में सफलता और शुभ फलों की प्राप्ति सुनिश्चित होती है। 9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार का दिन आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के साथ कई मंगलकारी योगों का सुंदर संयोग लेकर आ रहा है। यह दिन धन, ऐश्वर्य और भौतिक सुखों की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी की उपासना के लिए विशेष रूप से उत्तम माना गया है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार 9 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रहेगी। दिन की शुरुआत में सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 18 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त का समय सायं 5 बजकर 58 मिनट निर्धारित है। इस दिन चंद्र देव पूरे दिन कन्या राशि में संचार करेंगे, वहीं सूर्य देव भी कन्या राशि में ही विराजमान रहेंगे। नक्षत्रों की बात करें तो आज उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसके उपरांत हस्त नक्षत्र का प्रवेश होगा। इसके साथ ही दिनभर शुभ एवं ब्रह्म योग का निर्मित होना आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जप, तप और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत श्रेयस्कर वातावरण तैयार करता है।
दिन में किसी भी मांगलिक या नए कार्य को आरंभ करने के लिए अभिजीत मुहूर्त को सबसे श्रेष्ठ और सर्वसिद्धिदायक माना जाता है। 9 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 45 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा, जिस दौरान किए गए कार्य बिना किसी बाधा के सफल होते हैं। इसके विपरीत, ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अशुभ समय माना गया है, जिसमें कोई भी नया संकल्प, वित्तीय सौदा या यात्रा शुरू करने से बचना चाहिए। शुक्रवार के दिन राहुकाल प्रातः 10 बजकर 40 मिनट से दोपहर 12 बजकर 08 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस अवधि में महत्वपूर्ण कार्यों को स्थगित रखने की सलाह दी जाती है।
शुक्रवार का दिन होने के कारण आज का दिन देवी महालक्ष्मी तथा सौंदर्य व धन के कारक ग्रह 'शुक्र' को समर्पित होता है। इस पावन दिन पर प्रातःकाल स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण कर मां लक्ष्मी के समक्ष शुद्ध देशी घी का दीपक प्रज्वलित करें और लाल पुष्प अर्पित कर 'कनकधारा स्तोत्र' या महालक्ष्मी मंत्रों का भक्तिभाव से जाप करें। इसके साथ ही देवी लक्ष्मी को मखाने, मिश्री या खीर का भोग लगाएं और किसी जरूरतमंद महिला अथवा कन्या को अन्न या वस्त्र दान करें। आश्विन मास में किए जाने वाले इन धार्मिक उपायों से घर-परिवार में सुख, शांति, समृद्धि का वास होता है और दरिद्रता का नाश होता है।
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