Drishyam 3 Review: जॉर्जकुट्टी का आखिरी और सबसे बड़ा खेल; मोहनलाल की फिल्म का क्लाइमेक्स उड़ा देगा होश
नई दिल्ली। मलयालम सिनेमा के इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित सस्पेंस-थ्रिलर फ्रैंचाइज़ी का आखिरी हिस्सा 'दृश्यम 3' आखिरकार बड़े पर्दे पर आ चुका है, जिसे लेकर दर्शकों और समीक्षकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। अभिनेता मोहनलाल एक बार फिर जॉर्जकुट्टी के अपने सदाबहार और चतुर किरदार में लौटे हैं, जो अपने परिवार को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहता है। जीतू जोसेफ के शानदार निर्देशन में बनी यह फिल्म अपने पिछले दोनों भागों की तरह ही सस्पेंस, ड्रामा और माइंड गेम्स से भरपूर है। फिल्म की कहानी वहीं से आगे बढ़ती है जहां जॉर्जकुट्टी का अतीत एक बार फिर उसके वर्तमान को हिलाकर रख देता है और पुलिस इस केस को हमेशा के लिए सुलझाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देती है।
समीक्षा की बात करें तो 'दृश्यम 3' को इस ब्लॉकबस्टर फ्रैंचाइज़ी का एक बेहद संतोषजनक और धमाकेदार अंत माना जा रहा है। फिल्म का स्क्रीनप्ले बेहद कसा हुआ है, जो दर्शकों को स्क्रीन से बांधे रखता है और आखिरी मिनट तक यह अंदाजा लगाना मुश्किल कर देता है कि आगे क्या होने वाला है। मोहनलाल ने अपनी सधी हुई और पावरहाउस एक्टिंग से एक बार फिर साबित कर दिया है कि क्यों जॉर्जकुट्टी का किरदार भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन किरदारों में से एक है। फिल्म का क्लाइमेक्स और अंतिम ट्विस्ट इतना हैरान करने वाला है कि थियेटर में बैठे दर्शक दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर हो जाते हैं। अगर आप थ्रिलर फिल्मों के शौकीन हैं, तो जॉर्जकुट्टी के इस अंतिम और सबसे बड़े खेल को सिनेमाघरों में देखना एक बेहद शानदार अनुभव साबित होगा।

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