ग्रीन औद्योगिक विकास के प्रति छत्तीसगढ़ की प्रतिबद्धता और मजबूत,CII ग्रीन स्टील एंड माइनिंग समिट 2026 का समापन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सतत औद्योगिकीकरण का आह्वान किया, राज्य सरकार ने नीतिगत सुधारों को रेखांकित करते हुए स्टील एवं खनन क्षेत्र में निवेश के लिए आशय पत्र/एमओयू का किया आदान-प्रदान
नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ ने एक प्रतिस्पर्धी, निवेश-अनुकूल और टिकाऊ औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर मजबूत किया है। नवा रायपुर में आयोजित 5वें CII ग्रीन स्टील एंड माइनिंग समिट 2026 के दूसरे दिन छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के राज्य परिप्रेक्ष्य एवं विशेष संबोधन ने प्रमुख आकर्षण के रूप में सभी का ध्यान केंद्रित किया।
सत्र के दौरान वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास की प्राथमिकताओं, नीतिगत सुधारों तथा स्टील, खनन, विनिर्माण और संबद्ध क्षेत्रों में सतत निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। स्टेट पर्सपेक्टिव सत्र में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, CSIDC के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव विकास शील, आईएएस, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, आईएएस, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, आईएएस, CII के अध्यक्ष आर. मुकुंदन, CII ईस्टर्न रीजन की स्टील सब-कमेटी के चेयरमैन सिद्धार्थ अग्रवाल, CII छत्तीसगढ़ स्टेट काउंसिल के चेयरमैन बजरंग गोयल तथा CII ईस्टर्न रीजन के रीजनल डायरेक्टर देव ज्योति सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए।
इस अवसर पर निवेश के आशय पत्रों (Letters of Intent to Invest) का आदान-प्रदान भी किया गया, जो राज्य में औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने तथा नए निवेश को आकर्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

दो दिवसीय इस समिट में भारत सहित विदेशों से 700 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता ने इस आयोजन को वैश्विक स्वरूप प्रदान किया। समिट में स्टील एवं माइनिंग वैल्यू चेन से जुड़े नीति-निर्माताओं, विनिर्माताओं, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, सस्टेनेबिलिटी विशेषज्ञों और शिक्षाविदों सहित विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया।
समिट का मुख्य उद्देश्य नवीन तकनीकों, वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और प्रभावी नीतिगत ढांचे पर विचार-विमर्श करना था, ताकि भारत के स्टील क्षेत्र को कम-कार्बन और हरित विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।
समिट के दौरान:
8 तकनीकी सत्र एवं पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं, जिनमें 40 से अधिक विशेषज्ञ वक्ताओं ने भाग लिया। इन सत्रों में कम-उत्सर्जन वाले स्टील उत्पादन के मार्ग, ग्रीन स्टील को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप तथा कम-कार्बन स्टील उत्पादन से जुड़े वैश्विक उदाहरणों सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
55 से अधिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शनियों के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक तकनीकों से जुड़े अत्याधुनिक समाधान प्रदर्शित किए गए, जिससे तकनीकी प्रदाताओं और स्टील एवं खनन उद्योग के बीच सहयोग की नई संभावनाएं बनीं।
70 से अधिक उद्योगों ने सहभागिता की, जिनमें प्राथमिक एवं द्वितीयक स्टील उत्पादक, उपभोक्ता, अनुसंधान संस्थान, अंतरराष्ट्रीय संगठन और गैर-सरकारी संगठन शामिल रहे।
छत्तीसगढ़ बनेगा भारत का अग्रणी ग्रीन स्टील हब: मुख्यमंत्री - अपने विशेष संबोधन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि CII द्वारा आयोजित यह समिट छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और स्टील एवं माइनिंग सेक्टर को नई दिशा देने में मील का पत्थर साबित होगा।
उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ के पास भारत का अग्रणी ग्रीन स्टील हब बनने के लिए सभी आवश्यक संसाधन मौजूद हैं। हमारे पास प्रचुर मात्रा में खनिज संसाधन, मजबूत औद्योगिक आधार, विश्वसनीय बिजली व्यवस्था, कुशल मानव संसाधन और प्रगतिशील नीतिगत वातावरण है। भारत जहां वैश्विक स्टील पावरहाउस बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं नेट-जीरो के लक्ष्य को भी प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में छत्तीसगढ़ इस परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य ने स्टील उत्पादन क्षमता को वर्तमान 28 मिलियन टन से बढ़ाकर 45 मिलियन टन करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस औद्योगिक विस्तार को गति देने के लिए राज्य में नई औद्योगिक नीति लागू की गई है तथा जन विश्वास अधिनियम (Jan Vishwas Adhiniyam) के माध्यम से प्रक्रियाओं को सरल और उद्योग-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
औद्योगिक विकास में इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल प्रक्रियाओं पर जोर - छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (CSIDC) के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने राज्य की औद्योगिक विकास रणनीति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का औद्योगिक विकास वर्तमान में बुनियादी ढांचे के विस्तार, डिजिटल प्रक्रियाओं के एकीकरण और विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक विविधीकरण पर केंद्रित है।
उन्होंने कहा कि राज्य में अप्रैल 2025 से अब तक 13 औद्योगिक पार्कों का निर्माण पूरा किया जा चुका है, जबकि 7 अन्य परियोजनाएं वर्तमान में प्रगति पर हैं। राज्य में विशेषीकृत औद्योगिक क्लस्टर्स के विकास पर भी रणनीतिक रूप से ध्यान दिया जा रहा है, विशेषकर नवा रायपुर क्षेत्र में।
उन्होंने बताया कि राज्य के औद्योगिक पोर्टफोलियो में एक महत्वपूर्ण नई पहल के रूप में राजनांदगांव जिले में स्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना की जा रही है, जो छत्तीसगढ़ में भविष्य की उच्च-तकनीकी औद्योगिक संभावनाओं को बढ़ावा देगा।
विकास के साथ स्वच्छ और प्रतिस्पर्धी विनिर्माण जरूरी: CII - CII के अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज भारत की औद्योगिक महत्वाकांक्षाओं और सतत विकास की आवश्यकताओं के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा, “अपने मजबूत खनिज आधार, स्थापित स्टील इकोसिस्टम और तेजी से बढ़ती विनिर्माण क्षमता के साथ छत्तीसगढ़ के पास प्राथमिक उत्पादन से आगे बढ़कर उच्च मूल्यवर्धित, प्रतिस्पर्धी और स्वच्छ विनिर्माण का केंद्र बनने का अनूठा अवसर है। विकास के अगले चरण का उद्देश्य केवल अधिक स्टील और औद्योगिक उत्पादन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि अधिक मूल्यवर्धन, मजबूत सप्लाई चेन, स्वच्छ उत्पादन और सबसे महत्वपूर्ण रूप से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करना होना चाहिए।”
दो दिवसीय CII ग्रीन स्टील एंड माइनिंग समिट 2026 ने छत्तीसगढ़ को हरित औद्योगिक विकास, तकनीकी नवाचार और सतत निवेश की दिशा में अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान किया। समिट से स्टील एवं माइनिंगe सेक्टर में भविष्य के निवेश, तकनीकी सहयोग और स्वच्छ उत्पादन को लेकर नई संभावनाओं के मजबूत होने की उम्मीद है।
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