शराब पीने के बाद क्यों लड़खड़ाने लगती है जुबान और खो जाता है शरीर पर कंट्रोल? जानें दिमाग के भीतर क्या होता है
नई दिल्ली। हम अक्सर देखते हैं कि शराब पीने के बाद व्यक्ति का खुद पर नियंत्रण नहीं रहता; कोई लड़खड़ाकर चलता है, तो किसी की जुबान साफ नहीं निकलती। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कांच के गिलास से उतरी शराब आपके दिमाग के साथ ऐसा क्या करती है? रिपोर्ट के अनुसार, शराब सीधे तौर पर हमारे मस्तिष्क के 'कम्युनिकेशन नेटवर्क' पर हमला करती है।
आइए जानते हैं कि अल्कोहल आपके दिमाग के अलग-अलग हिस्सों को कैसे प्रभावित करता है:
1. सेरेब्रल कॉर्टेक्स: निर्णय लेने की क्षमता का खत्म होना
मस्तिष्क का यह हिस्सा सोचने-समझने और निर्णय लेने (Decision Making) के लिए जिम्मेदार होता है। शराब सबसे पहले इसी हिस्से को सुस्त कर देती है। यही कारण है कि व्यक्ति अपनी झिझक (Inhibition) खो देता है और ऐसी बातें बोल जाता है या ऐसे काम कर देता है जो वह होश में कभी नहीं करता।
2. सेरिबैलम: संतुलन का बिगड़ना (Loss of Balance)
लड़खड़ाकर चलना या सीधे खड़े न हो पाना, यह सब सेरिबैलम (Cerebellum) पर शराब के असर के कारण होता है। मस्तिष्क का यह हिस्सा शरीर के संतुलन और मांसपेशियों के समन्वय (Coordination) को नियंत्रित करता है। जब अल्कोहल यहाँ पहुँचता है, तो हाथ-पैरों का तालमेल बिगड़ जाता है।
3. हिप्पोकैम्पस: याददाश्त का धुंधला होना (Blackouts)
क्या आपको याद है कल रात क्या हुआ था? अगर नहीं, तो इसका जिम्मेदार हिप्पोकैम्पस (Hippocampus) है। यह हिस्सा नई यादें बनाने का काम करता है। शराब की अधिक मात्रा इस प्रक्रिया को बाधित कर देती है, जिससे व्यक्ति को 'ब्लैकआउट' महसूस होता है और उसे नशे की हालत में हुई घटनाएं याद नहीं रहतीं।
4. मेडुला: जीवन रक्षक कार्यों पर खतरा
मस्तिष्क का यह हिस्सा सांस लेने, हृदय गति और शरीर के तापमान जैसी अनैच्छिक क्रियाओं (Involuntary Actions) को नियंत्रित करता है। जब कोई व्यक्ति बहुत अधिक मात्रा में शराब पी लेता है, तो मेडुला (Medulla) सुस्त पड़ जाता है, जिससे नींद आना या गंभीर मामलों में सांस रुकने जैसी जानलेवा स्थिति बन सकती है।
5. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) का धीमा होना
अल्कोहल एक 'डिप्रेंट' (Depressant) है, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की गतिविधि को धीमा कर देता है। यह न्यूरोट्रांसमीटर्स (जैसे GABA और Glutamate) के संतुलन को बिगाड़ देता है। इससे सूचनाएं भेजने की गति धीमी हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप प्रतिक्रिया समय (Reaction Time) बढ़ जाता है—यही कारण है कि शराब पीकर गाड़ी चलाना खतरनाक होता है।

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