आम आदमी की रसोई में लगी 'महंगाई की आग' : 6 महीने में 7 बार बढ़े गैस के दाम, जानें अब कितना हुआ बोझ

आम आदमी की रसोई में लगी 'महंगाई की आग' : 6 महीने में 7 बार बढ़े गैस के दाम, जानें अब कितना हुआ बोझ

नई दिल्ली : एक तरफ भीषण गर्मी की मार और दूसरी तरफ आसमान छूती महंगाई ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है। घरेलू बजट पहले से ही बिगड़ा हुआ था, लेकिन अब रसोई गैस (LPG) की कीमतों ने रही-कही कसर भी पूरी कर दी है। पिछले महज 6 महीनों के भीतर गैस सिलेंडर की कीमतों में 7 बार इजाफा किया गया है, जो मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए एक बड़ा 'महंगाई का झटका' है।

लगातार बढ़ती कीमतें: एक नजर में

पिछले आधे साल का डेटा देखें तो समझ आता है कि रसोई गैस के दाम कितनी तेजी से बढ़े हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता का हवाला देते हुए तेल कंपनियों ने किश्तों में दाम बढ़ाए हैं।

  • 6 महीने का सफर: नवंबर 2025 से मई 2026 के बीच कीमतों में लगातार संशोधन हुआ।

  • कुल बढ़ोतरी: इन 7 संशोधनों के बाद घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में औसतन 150 से 200 रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

आम जनता की जेब पर सीधा असर

महंगाई की इस मार ने गृहिणियों के किचन बजट को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।

  1. महीने का बजट बिगड़ा: राशन और सब्जियों के बाद अब गैस के बढ़ते दामों ने बचत को शून्य कर दिया है।

  2. कमर्शियल सिलेंडर भी महंगे: केवल घरेलू ही नहीं, कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से बाहर खाना पीना और होटल-रेस्टोरेंट के बिल भी महंगे हो गए हैं।

  3. ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौतियां: उज्ज्वला योजना के कई लाभार्थियों के लिए अब रिफिल कराना एक चुनौती बनता जा रहा है, जिससे कई परिवार फिर से पारंपरिक ईंधन की ओर लौटने को मजबूर हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत इस बढ़ोत्तरी के मुख्य कारण हैं। हालांकि, विपक्ष और सामाजिक संगठनों द्वारा सरकार से सब्सिडी बढ़ाने या टैक्स में कटौती कर जनता को राहत देने की मांग तेज हो गई है।

सरकार का पक्ष

सरकार का कहना है कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और गरीब वर्ग को सुरक्षा प्रदान करने के लिए विभिन्न योजनाओं के जरिए राहत देने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए फिलहाल कीमतों में बड़ी गिरावट के संकेत नहीं दिख रहे हैं।