पत्नी के करवाचौथ का व्रत न रखने पर पति पहुंचा हाई कोर्ट: तलाक की याचिका खारिज, कोर्ट बोला- 'यह क्रूरता नहीं'

पत्नी के करवाचौथ का व्रत न रखने पर पति पहुंचा हाई कोर्ट: तलाक की याचिका खारिज, कोर्ट बोला- 'यह क्रूरता नहीं'
बिलासपुर: करवाचौथ का व्रत न रखने और पूजा में शामिल न होने को आधार बनाकर तलाक मांगने वाले एक पति को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से झटका लगा है। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने पति की अपील याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पत्नी द्वारा करवाचौथ का व्रत न रखना या धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन न करना हिंदू विवाह अधिनियम के तहत 'मानसिक क्रूरता' के दायरे में नहीं आता है।

मामला राज्य के फैमिली कोर्ट से हाई कोर्ट पहुंचा था, जहां पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी वैवाहिक जीवन के स्थापित धार्मिक और पारंपरिक रीति-रिवाजों का सम्मान नहीं करती है। पति के अनुसार, पत्नी द्वारा करवाचौथ का व्रत न रखना उसके प्रति उपेक्षा और मानसिक क्रूरता को दर्शाता है, इसलिए उसे तलाक की अनुमति दी जानी चाहिए। फैमिली कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद पति ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक व्रत या अनुष्ठान का पालन करना व्यक्ति की अपनी आस्था और व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है। अदालत ने कहा कि पत्नी द्वारा ऐसे व्रत न रखने को पति के प्रति क्रूरता नहीं माना जा सकता और न ही यह विवाह विच्छेद (तलाक) का कोई वैधानिक आधार बन सकता है। इसके साथ ही अदालत ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका पूरी तरह से निरस्त कर दी।