ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, मौजूदा कानून और निर्देशों को लागू करने के दिए आदेश

ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, मौजूदा कानून और निर्देशों को लागू करने के दिए आदेश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को मौजूदा कानूनों और सरकारी निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026 के विधायी प्रक्रिया में लंबित होने को वर्तमान कानूनों के क्रियान्वयन में ढिलाई का आधार नहीं बनाया जा सकता।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़े स्वतः संज्ञान जनहित मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिए।

कोलाहल नियंत्रण विधेयक का तैयार हुआ प्रारूप

सुनवाई के दौरान गृह विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से व्यक्तिगत शपथपत्र पेश किया गया। इसमें राज्य सरकार ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए व्यापक कानूनी व्यवस्था तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, गृह विभाग के 31 मार्च 2026 के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में आवश्यक संशोधन के लिए एक प्रारूप समिति गठित की गई थी। समिति ने छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026 का हिंदी और अंग्रेजी में प्रारूप तैयार कर लिया है।

इसके साथ ही आवश्यक कार्रवाई रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज भी तैयार किए जा चुके हैं। राज्य सरकार के अनुसार, विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा और इसके बाद विधेयक विधानसभा में पेश किया जाएगा।

विधेयक की प्रक्रिया को लेकर कोर्ट ने दिया समय

हाईकोर्ट ने माना कि प्रस्तावित विधेयक को लेकर प्रक्रिया प्रारंभिक चरण से आगे बढ़ चुकी है और मामला अब संबंधित प्रशासनिक स्तर पर सक्रिय रूप से विचाराधीन है। इस प्रगति को देखते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को शेष प्रशासनिक और विधायी प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है।

मामले को अब आठ सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है।

मौजूदा कानून लागू करने में नहीं बरती जाए ढिलाई

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नया विधेयक अभी लंबित है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वर्तमान में लागू कानूनों और सरकारी निर्देशों के पालन में किसी तरह की कमी की जाए।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निकायों और अन्य संबंधित एजेंसियों को ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए प्रभावी और निवारक कार्रवाई लगातार जारी रखने के निर्देश दिए।

कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावित कानून की विधायी प्रक्रिया लंबित होने को मौजूदा वैधानिक प्रावधानों और कार्यकारी निर्देशों के क्रियान्वयन में ढिलाई का आधार नहीं बनाया जा सकता।

लाउडस्पीकर और पटाखों पर विशेष निगरानी

हाईकोर्ट ने विशेष रूप से लाउडस्पीकर, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली, ध्वनि विस्तारक यंत्र, पटाखों और अन्य अत्यधिक शोर पैदा करने वाले साधनों के नियमन पर ध्यान देने को कहा है।

अदालत ने रात के समय और शांत क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विशेष सावधानी बरतने के निर्देश भी दिए हैं।

कोर्ट ने साफ किया कि जब तक प्रस्तावित नया कानून लागू नहीं हो जाता, तब तक वर्तमान कानूनी व्यवस्था के तहत ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई प्रभावी तरीके से जारी रहनी चाहिए।