फैटी लीवर के शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज: समय पर जांच और सही जीवनशैली से संभव है बचाव

फैटी लीवर के शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज: समय पर जांच और सही जीवनशैली से संभव है बचाव
नई दिल्ली (हेल्थ डेस्क): अनियंत्रित खान-पान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और तेजी से बदलती जीवनशैली के कारण आज के समय में फैटी लीवर (Fatty Liver) एक गंभीर और आम स्वास्थ्य समस्या बनकर उभर रहा है। लीवर में जरूरत से ज्यादा वसा (फैट) का जमा होना ही फैटी लीवर की स्थिति कहलाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती चरणों में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिससे लोग इसे अक्सर सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, सही समय पर जांच और उचित जानकारी के जरिए इस बीमारी को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है।

फैटी लीवर के प्रमुख लक्षण और शुरुआती संकेत

यद्यपि फैटी लीवर को अक्सर 'साइलेंट डिसीज' माना जाता है, फिर भी शरीर में कुछ ऐसे शुरुआती संकेत दिखाई देते हैं जो लीवर में अतिरिक्त वसा जमा होने की ओर इशारा करते हैं। सबसे प्रमुख लक्षण पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में लगातार हल्का दर्द या भारीपन महसूस होना है। इसके अलावा, बिना किसी भारी मेहनत के लगातार थकान और कमजोरी बने रहना, भूख में कमी आना, जी मिचलाना और असमय वजन का घटना इसके मुख्य संकेत हैं। बीमारी के एडवांस स्टेज में पहुंचने पर पैरों व पेट में सूजन और त्वचा या आंखों का पीला पड़ना जैसे लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं।

समय पर जांच और सही निदान (Diagnosis) क्यों है जरूरी?

फैटी लीवर का सही समय पर निदान न होने पर यह धीरे-धीरे लीवर फाइब्रोसिस, सिरोसिस या लीवर फेलियर जैसी जानलेवा स्थितियों में बदल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 30 से 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित हेल्थ चेकअप कराना बेहद जरूरी है। फैटी लीवर की सटीक पहचान के लिए ब्लड टेस्ट के जरिए 'लीवर फंक्शन टेस्ट' (LFT), एब्डोमिनल अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) और फिब्रोस्कैन (FibroScan) जैसी आधुनिक जांचें की जाती हैं। शुरुआती चरण में रोग की पहचान हो जाने पर केवल खान-पान और दिनचर्या में सुधार करके लीवर को दोबारा स्वस्थ बनाया जा सकता है।

फैटी लीवर से बचाव के लिए जीवनशैली में आवश्यक सुधार

चिकित्सकों के अनुसार, फैटी लीवर से बचाव और इसके इलाज में जीवनशैली का संतुलन सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आहार में रिफाइंड शुगर, जंक फूड, अत्यधिक तैलीय और प्रसंस्कृत (Processed) खाद्य पदार्थों का सेवन तुरंत कम करना चाहिए। इसकी जगह हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और फाइबर से भरपूर भोजन को शामिल करें। इसके साथ ही, रोजाना कम से कम 30 से 40 मिनट का नियमित व्यायाम या वॉक करें, शराब के सेवन से दूरी बनाएं और यदि आपको डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, तो उसे नियंत्रित रखें।