नई दिल्ली: भारत में गैर-संचारी रोगों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों के अनुसार, देश इस समय एक गंभीर 'मेटाबॉलिक संकट' (Metabolic Crisis) के दौर से गुजर रहा है। टाइप-2 डायबिटीज, फैटी लिवर, उच्च रक्तचाप (Hypertension) और मोटापे जैसी बीमारियों के मामले युवाओं और कामकाजी वयस्कों में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते खान-पान और दिनचर्या में बदलाव नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह संकट देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव डाल सकता है।
क्या है मेटाबॉलिक संकट और क्यों है यह खतरनाक?
मेटाबॉलिक सिंड्रोम किसी एक बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि यह शरीर में होने वाले कई विकारों का एक समूह (Cluster) है। जब शरीर में चयापचय (Metabolism) की प्रक्रिया बाधित होती है, तो कमर के पास अत्यधिक चर्बी, इंसुलिन रेजिस्टेंस और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं एक साथ जन्म लेती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पहले ये समस्याएं 50 की उम्र के बाद देखने को मिलती थीं, लेकिन अब 20 से 35 वर्ष के युवा भी इस संकट की चपेट में आ रहे हैं।
इस संकट के मुख्य कारण
1. अत्यधिक प्रोसेस्ड और जंक फूड का सेवन: पैक्ड स्नैक्स, रिफाइंड मैदा, जंक फूड, शुगरी ड्रिंक्स और ट्रांस-फैट युक्त भोजन का बढ़ता चलन इसके प्रमुख कारणों में से एक है। इन खाद्य पदार्थों में पोषण न के बराबर होता है, जबकि कैलोरी बहुत अधिक होती है।
2. गतिहीन जीवनशैली: डेस्क जॉब, घंटों स्क्रीन के सामने बैठना, पैदल चलने में कमी और शारीरिक व्यायाम न करना। शारीरिक गतिविधि कम होने से शरीर कैलोरी बर्न नहीं कर पाता और फैट लिवर व पेट के आसपास जमा होने लगता है।
बचाव के उपाय
डॉक्टरों की सलाह है कि रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और चीनी का सेवन कम करें, भोजन में फाइबर व प्रोटीन बढ़ाएं, रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें, पैक्ड फूड से दूरी बनाएं और नियमित रूप से फास्टिंग ब्लड शुगर व लिपिड प्रोफाइल की जांच करवाएं।