रीढ़ की सेहत के लिए जरूरी हैं छोटी आदतें, लंबे समय तक पीठ दर्द से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय

रीढ़ की सेहत के लिए जरूरी हैं छोटी आदतें, लंबे समय तक पीठ दर्द से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय

रायपुर। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठकर काम करना, गलत तरीके से भारी सामान उठाना और शारीरिक गतिविधियों की कमी रीढ़ की सेहत को प्रभावित कर सकती है। रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव कर पीठ दर्द के जोखिम को कम करने और लंबे समय तक रीढ़ को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित रूप से चलना, मांसपेशियों को मजबूत बनाना और बैठने के दौरान बीच बीच में स्थिति बदलना रीढ़ की देखभाल के महत्वपूर्ण तरीके हैं।

एमएमआई नारायणा अस्पताल, रायपुर के कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन डॉ. घनश्याम बिसन ससापरधी के अनुसार, रीढ़ की समस्याएं हमेशा अचानक नहीं होतीं। कई बार रोजमर्रा की गतिविधियों और लंबे समय तक अपनाई जाने वाली आदतों का भी इस पर असर पड़ता है। इसलिए दर्द शुरू होने का इंतजार करने के बजाय पहले से रीढ़ की देखभाल करना जरूरी है।

लंबे समय तक बैठने से बचें

रीढ़ को स्वस्थ रखने के लिए शरीर को नियमित रूप से सक्रिय रखना जरूरी है। लंबे समय तक बिना हिले बैठे रहने से पीठ और गर्दन पर दबाव बढ़ सकता है। डॉ. ससापरधी के अनुसार, दफ्तर में काम करने वाले लोगों को हर 30 से 45 मिनट में अपनी स्थिति बदलनी चाहिए। इस दौरान कुछ देर खड़े होना, थोड़ा चलना और पानी पीना उपयोगी हो सकता है।

कंप्यूटर की स्क्रीन को आंखों की सीध में रखना चाहिए। मोबाइल देखते समय भी लगातार गर्दन झुकाकर बैठने से बचना चाहिए। इसके साथ ही समय समय पर कंधों को घुमाना और कुछ देर दूर देखना गर्दन तथा कंधों पर पड़ने वाले तनाव को कम करने में मदद कर सकता है।

कोर मांसपेशियों को मजबूत बनाना जरूरी

पेट, पीठ और कूल्हों की मांसपेशियां शरीर को सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन मांसपेशियों को मजबूत रखने से रीढ़ को स्थिरता मिलती है। इसके लिए प्लैंक, ब्रिज और स्क्वैट जैसे व्यायाम किए जा सकते हैं।

विशेषज्ञ के अनुसार, नियमित व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। हालांकि, व्यायाम का चुनाव अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार करना जरूरी है। पहले से पीठ दर्द या किसी अन्य समस्या से जूझ रहे लोगों को व्यायाम शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

भारी सामान उठाते समय रखें सावधानी

भारी सामान को गलत तरीके से उठाने पर पीठ में चोट लग सकती है। सामान उठाते समय घुटनों को मोड़कर नीचे झुकना चाहिए और वजन को शरीर के करीब रखते हुए उठाना चाहिए। अचानक झटका देने या कमर को मोड़कर भारी वजन उठाने से बचना चाहिए। संभव हो तो भारी सामान उठाने में किसी अन्य व्यक्ति की मदद लेनी चाहिए।

नींद, वजन और धूम्रपान का भी पड़ता है असर

रीढ़ की सेहत के लिए पर्याप्त आराम और सोने की सही स्थिति भी महत्वपूर्ण है। करवट लेकर सोते समय घुटनों के बीच तकिया रखने और पीठ के बल सोते समय घुटनों के नीचे तकिया रखने से कुछ लोगों को आराम मिल सकता है।

शरीर का अतिरिक्त वजन पीठ पर दबाव बढ़ा सकता है। इसलिए संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधियों के जरिए स्वस्थ वजन बनाए रखना उपयोगी है। डॉ. ससापरधी के अनुसार, धूम्रपान से भी बचना चाहिए, क्योंकि यह रक्त प्रवाह और रीढ़ की डिस्क तक पोषक तत्व पहुंचने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

पीठ दर्द लंबे समय तक बना रहे या रोजमर्रा के कामकाज को प्रभावित करे, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। यदि दर्द कमर से पैर तक फैल रहा हो या उसके साथ सुन्नपन अथवा कमजोरी महसूस हो रही हो, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

चोट या हादसे के बाद तेज पीठ दर्द होने पर भी तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। वहीं, पेशाब या मल पर नियंत्रण में परेशानी, जांघों के बीच के हिस्से में सुन्नपन या पैरों में तेजी से बढ़ती कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

नियमित देखभाल से मिल सकता है लंबे समय तक लाभ

डॉ. ससापरधी के अनुसार, रीढ़ को स्वस्थ रखने के लिए किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय रोजमर्रा की आदतों में लगातार सुधार करना जरूरी है। सक्रिय रहना, लंबे समय तक एक ही स्थिति में नहीं बैठना, मांसपेशियों को मजबूत बनाना, सही तरीके से वजन उठाना और शरीर के संकेतों पर ध्यान देना पीठ की सेहत बनाए रखने में मदद कर सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते सावधानी बरतने और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेने से रीढ़ की समस्याओं को बेहतर ढंग से संभालने में मदद मिल सकती है।