हाथ-पैरों को मजबूत बनाने और शरीर की जकड़न दूर करने के लिए रोज करें गरुड़ासन; जानें इसके फायदे और सही विधि

हाथ-पैरों को मजबूत बनाने और शरीर की जकड़न दूर करने के लिए रोज करें गरुड़ासन; जानें इसके फायदे और सही विधि

नई दिल्ली: दिनभर कंप्यूटर के आगे घंटों बैठे रहने, शारीरिक निष्क्रियता और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण आजकल ज्यादातर लोग मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों के दर्द और शरीर में जकड़न (Body Stiffness) की समस्या से परेशान रहते हैं। यदि आप बिना किसी महंगे जिम उपकरण के अपने हाथ-पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाना चाहते हैं और शरीर का संतुलन सुधारना चाहते हैं, तो गरुड़ासन (Eagle Pose) आपके लिए एक अत्यंत प्रभावशाली योगासन है।

गरुड़ासन दो शब्दों से मिलकर बना है 'गरुड़' (पक्षीराज) और 'आसन'। इस योगासन को करते समय शरीर की आकृति एक गरुड़ पक्षी जैसी दिखाई देती है। नियमित रूप से केवल 5 से 10 मिनट इसका अभ्यास करने से न केवल शारीरिक मजबूती मिलती है, बल्कि मानसिक एकाग्रता भी बढ़ती है।

गरुड़ासन के 5 प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

  1. हाथों और पैरों की मांसपेशियों को मजबूती:

    इस आसन में जांघों, कूल्हों, पिंडली (Calves) और कंधों पर खिंचाव आता है, जिससे हाथ और पैर मजबूत होते हैं और उनकी टोनिंग होती है।

  2. शरीर का संतुलन और एकाग्रता (Balance & Focus):

    एक पैर पर संतुलन बनाए रखने की प्रक्रिया से मस्तिष्क का संतुलन केंद्र सक्रिय होता है, जिससे ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और मानसिक स्थिरता बढ़ती है।

  3. जोड़ों और मांसपेशियों की जकड़न से राहत:

    अंकुश की तरह हाथ-पैरों को लपेटने से कंधों, कोहनी, घुटनों और टखनों के जोड़ों में जमा जकड़न दूर होती है और शरीर में लचीलापन (Flexibility) आता है।

  4. साइटिका और नसों के दर्द में असरदार:

    यह आसन पेल्विक रीजन और पीठ के निचले हिस्से की नसों को स्ट्रेच करता है, जिससे साइटिका (Sciatica) के दर्द में राहत मिलती है।

  5. पाचन और रक्त संचार में सुधार:

    आसन के दौरान पेट के निचले हिस्से पर पड़ने वाले दबाव से आंतरिक अंगों की मालिश होती है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर होता है और शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है।

गरुड़ासन करने की सही स्टेप-बाय-स्टेप विधि

1.सावधान मुद्रा में खड़े हों:शुरुआती स्थिति.

सबसे पहले योग मैट पर सीधे (ताड़ासन की मुद्रा में) खड़े हो जाएं। गहरी सांस लें और अपना पूरा वजन दाहिने पैर पर संतुलित करें।

2.पैरों को आपस में लपेटें:निचले शरीर का संतुलन.

बाएं पैर को घुटने से थोड़ा मोड़ते हुए दाहिनी जांघ के ऊपर से घुमाएं और बाएं पैर के पंजे को दाहिनी पिंडली के पीछे अटका लें।

3.हाथों को क्रॉस करें:ऊपरी शरीर की स्थिति.

दोनों हाथों को सामने लाएं। अब बाईं कोहनी को दाहिनी कोहनी के ऊपर रखते हुए दोनों हाथों को आपस में लपेट लें और दोनों हथेलियों को मिलाने की कोशिश करें।

4.संतुलन बनाएं और सांस पर ध्यान दें:अंतिम मुद्रा.

घुटनों को हल्का सा मोड़ें जैसे आप कुर्सी पर बैठने जा रहे हों। सामने किसी एक बिंदु पर नजर टिकाएं और 15 से 30 सेकंड तक सामान्य सांस लेते हुए इसी मुद्रा में रुकें।

5.दूसरी तरफ से दोहराएं:पुनरावृत्ति.

धीरे-धीरे हाथ और पैर खोलें, सामान्य स्थिति में आएं और यही प्रक्रिया पैर और हाथ बदलकर दूसरी तरफ से भी दोहराएं।

अभ्यास के दौरान रखें ये सावधानियां

  • घुटने या टखने में चोट: यदि आपके घुटनों, टखनों या कंधों में गंभीर चोट या तेज दर्द है, तो इस आसन का अभ्यास करने से बचें।

  • गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं को बिना योग प्रशिक्षक की देखरेख के संतुलन बनाने वाले इस आसन को नहीं करना चाहिए।

  • चक्कर आने की समस्या: यदि आपको लो ब्लड प्रेशर, वर्टिगो या चक्कर आने की शिकायत है, तो दीवार का सहारा लेकर ही इसका अभ्यास करें।