नए आपराधिक कानून पर दो को कार्यशाला, प्रभावी क्रियान्वयन पर होगा गहन मंथन

नए आपराधिक कानून पर दो को कार्यशाला, प्रभावी क्रियान्वयन पर होगा गहन मंथन
 मुख्यमंत्री, न्यायिक अधिकारी सभी एसपी होंगे शामिल
रायपुर (चैनल इंडिया)। देश में एक जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानूनों के दो वर्ष पूरे होने के बाद उनके प्रभावी क्रियान्वयन, अब तक के अनुभवों और भविष्य की कार्ययोजना पर मंथन के लिए छत्तीसगढ़ में दो अगस्त को राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायाधीश, पुलिस, अभियोजन एवं न्यायिक तंत्र के वरिष्ठ अधिकारी तथा प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक (एसपी) शामिल होंगे। इस दौरान नए कानूनों के क्रियान्वयन की समीक्षा के साथ पुलिस अधिकारियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
कार्यशाला में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) के दो वर्षों के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। विभिन्न जिलों में इन कानूनों के लागू होने के बाद सामने आए अनुभवों, चुनौतियों और बेहतर कार्यप्रणालियों पर चर्चा होगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा त्वरित, पारदर्शी और तकनीक आधारित आपराधिक न्याय प्रणाली को लागू करने में राज्य कितना सफल रहा है।
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नए आपराधिक कानूनों के व्यावहारिक क्रियान्वयन का प्रशिक्षण देना भी है। इसमें अपराध दर्ज करने की नई प्रक्रिया, विवेचना की समय-सीमा, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल साक्ष्यों का संग्रह और संरक्षण, फोरेंसिक साक्ष्यों के अनिवार्य उपयोग, गिरफ्तारी और तलाशी की नई कानूनी प्रक्रिया, पीडि़तों के अधिकार, चार्जशीट की समयबद्ध तैयारी तथा अभियोजन के साथ समन्वय जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा। प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों की मौजूदगी में यह सुनिश्चित करने पर भी चर्चा होगी कि नए कानूनों का पालन पूरे राज्य में एक समान तरीके से हो। कार्यशाला में केस स्टडी, न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णय, विवेचना के दौरान होने वाली सामान्य त्रुटियां तथा उनके समाधान साझा किए जाएंगे, ताकि जांच की  गुणवत्ता और दोषसिद्धि दर में सुधार लाया जा सके।
मुख्यमंत्री देंगे दिशा-निर्देश
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्य में कानून-व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, तकनीक आधारित तथा नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करेंगे। उनसे नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर पुलिसिंग के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाने की भी संभावना है।