भाजपा में महासंग्राम की तैयारी! 25 के बाद रायपुर से दिल्ली तक बड़े बदलाव के संकेत

भाजपा में महासंग्राम की तैयारी! 25 के बाद रायपुर से दिल्ली तक बड़े बदलाव के संकेत
रायपुर (चैनल इंडिया)। भारतीय जनता पार्टी में 25 मई के बाद बड़े राजनीतिक और संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दिल्ली से लेकर रायपुर तक लगातार बैठकों और अंदरूनी मंथन ने यह संकेत दे दिए हैं कि पार्टी अब अगले चुनावी चरण की तैयारी में जुट चुकी है। पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी चुनाव के बाद भाजपा का पूरा फोकस अब 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव पर है। यही वजह है कि संगठन और सरकार दोनों स्तर पर नए संतुलन की तैयारी शुरू हो गई है।
संविधान के अनुसार, केंद्र सरकार में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं। फिलहाल करीब 72 मंत्री ही हैं। यानी अभी नौ पद खाली हैं। इसी वजह से लंबे समय से केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा चल रही है। भाजपा शासित राज्यों से नए चेहरों को मौका देने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि छत्तीसगढ़ से भी किसी सांसद को केंद्रीय मंत्री बनाया जा सकता है। भाजपा सिर्फ  सरकार नहीं, बल्कि संगठन को भी नए तरीके से तैयार करने में लगी है। पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर उपाध्यक्ष, महामंत्री और मंत्री जैसे पदों पर नई नियुक्तियां कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ से 5 से 6 नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह मिल सकती है। इनमें कुछ नेताओं को दूसरे राज्यों की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है।
मुख्यमंत्री, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं के बीच कई दौर की बंद कमरे में चर्चा हो चुकी है। इन बैठकों में सिर्फ संगठन समीक्षा नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीतिक रणनीति, नेतृत्व संतुलन और सरकार की परफॉर्मेंस पर भी चर्चा हुई है। सूत्रों का दावा है कि पार्टी नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ में सरकार और संगठन दोनों को लेकर फीडबैक और सर्वे कराया है। उसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति बनाई जा रही है। यह चर्चा तेज हो गई कि भाजपा अब संगठन में नई पीढ़ी और नए राजनीतिक समीकरणों को आगे बढ़ाना चाहती है। 
संगठन में सबसे ज्यादा चर्चा डिप्टी सीएम विजय शर्मा को लेकर है। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। भाजपा फिलहाल ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाना चाहती है जो एक्टिव राजनीति, चुनावी प्रबंधन और संगठन विस्तार में प्रभावी माने जाते हैं। उपमुख्यमंत्री अरुण साव का नाम भी चर्चा में है, लेकिन विजय शर्मा को लेकर राजनीतिक संकेत ज्यादा मजबूत दिखाई दे रहे हैं।
महिला नेतृत्व पर फोकस
अगर सरकार या संगठन में बड़ा बदलाव होता है, तो भाजपा महिला नेतृत्व को भी आगे ला सकती है। राजनीतिक चर्चाओं में लता उसेंडी और रेणुका सिंह जैसे नाम सामने आ रहे हैं। इसके पीछे भाजपा की साफ रणनीति मानी जा रही है। पार्टी महिला, आदिवासी और ओबीसी वर्ग के बीच नया सामाजिक संतुलन बनाना चाहती है। खासकर सरगुजा और बस्तर क्षेत्र को ध्यान में रखकर भविष्य की राजनीति तैयार की जा रही है।
मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा
मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की संभावना लगातार बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, 2 से 4 मंत्री पदों पर बदलाव हो सकता है। इस बार पुराने चेहरों की तुलना में नए विधायकों को मौका मिलने की संभावना ज्यादा बताई जा रही है। भावना बोहरा, पुरंदर मिश्रा, सुशांत शुक्ला और सरगुजा क्षेत्र की किसी महिला आदिवासी विधायक के नाम राजनीतिक चर्चाओं में शामिल हैं। पार्टी सत्ता में आने के बाद अब दूसरे चरण की रणनीति लागू कर रही है। कई नेताओं के खिलाफ  बढ़ते एंटी इनकंबेंसी माहौल को देखते हुए पार्टी बड़े बदलाव की रणनीति पर काम कर रही है।