हालात जानने न मंत्री सामने आए न ही अफसर
रायपुर (चैनल इंडिया)। राज्य में पेट्रोल-डीजल को लेकर पिछले तीन दिनों में जो हालात बने, उन्होंने सरकार और प्रशासन के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सिर्फ सवाल ही नहीं बल्कि दावों की पोल भी खोल दी है।
एक तरफ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय यह कह रहे कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है, सभी ऑयल डिपो में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और सप्लाई व्यवस्था पूरी तरह सुचारू है। दूसरी तरफ राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर आधा-आधा किलोमीटर लंबी लाइनें लगी रहीं, कई पंपों पर ‘नो पेट्रोल’ के बोर्ड नजर आए और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
प्रदेशभर में पैनिक बाइंग शुरू हो गई। जो लोग सामान्य दिनों में 100-200 रुपए का पेट्रोल भरवाते थे, वे फुल टैंक कराने पहुंचने लगे। कई लोगों ने अतिरिक्त पेट्रोल और डीजल स्टोर करना भी शुरू कर दिया। अचानक बढ़ी डिमांड का असर सीधे पेट्रोल पंपों पर दिखाई देने लगा। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग समेत कई शहरों में लंबी कतारें लग गईं। कई जगह पेट्रोल खत्म हो गया और कुछ पेट्रोल पंपों को अस्थायी रूप से बंद तक करना पड़ा। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और ज्यादा खराब दिखाई दी।
सबसे हैरानी की बात यह रही कि लगातार तीन दिनों तक प्रदेशभर में लोग परेशान होते रहे, लेकिन सरकार या प्रशासन की तरफ से कोई मजबूत और स्पष्ट संदेश सामने नहीं आया। न कोई मंत्री हालात देखने सडक़ पर उतरा, न कोई बड़ा अधिकारी जनता को भरोसा दिलाता नजर आया। जब हालात ज्यादा बिगडऩे लगे, तब गुरुवार को रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह ने पेट्रोल पंप एसोसिएशन और तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद प्रशासन ने दावा किया कि प्रदेश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और संकट सप्लाई का नहीं बल्कि पैनिक बाइंग का है।
अधिकारियों ने कहा कि अचानक फुल टैंक करवाने की वजह से दबाव बढ़ गया है। यानी प्रशासन ने पहली बार सार्वजनिक रूप से माना कि खपत अचानक कई गुना बढ़ गई है। प्रशासन के दावों ने यह सवाल भी खड़े कर दिया कि अगर डिपो में पर्याप्त स्टॉक था, तो फिर पेट्रोल पंप खाली क्यों हो रहे थे? इसे लेकर जानकारी सामने आई कि कई पेट्रोल पंपों तक समय पर टैंकर नहीं पहुंच पा रहे थे। कहीं भुगतान और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें थीं, तो कहीं अचानक बढ़ी डिमांड के कारण टैंकरों पर दबाव बढ़ गया था। यानी स्टॉक मौजूद होने के बावजूद सप्लाई चेन सामान्य तरीके से काम नहीं कर पा रही थी।
सरकारी अमले ने वर्क फ्राम होम की मांग की
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने राज्य सरकार से शासकीय कार्यालयों में वर्क फ्राम होम कार्य प्रणाली लागू करने की मांग की है। इस संबंध में फेडरेशन की ओर से मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखा गया है। फेडरेशन के अध्यक्ष कमल वर्मा ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों एवं संभावित ईंधन संकट को देखते हुए यह कदम समयानुकूल और जनहित में होगा। फेडरेशन ने अपने पत्र में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऊर्जा संरक्षण और अनावश्यक आवागमन कम करने की अपील के मद्देनजर यह कदम अत्यंत समयानुकूल और जनहितकारी होगा। फेडरेशन के अध्यक्ष कमल वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पहले से ही ई-ऑफिस और पेपरलेस कार्यप्रणाली लागू है, जिससे अधिकांश प्रशासनिक कार्य ऑनलाइन किए जा सकते हैं।
पत्र में विशेष रूप से नवा रायपुर स्थित मंत्रालय एवं अन्य शासकीय कार्यालयों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी निजी एवं सरकारी वाहनों से आवागमन करते हैं। वर्क फ्रॉम होम लागू करने से ईंधन की भारी बचत के साथ यातायात के दबाव और वायु प्रदूषण में भी कमी आएगी। फेडरेशन ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए राज्य के शासकीय कार्यालयों में चरणबद्ध तरीके से या आवश्यकतानुसार वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू करने के निर्देश जारी किए जाएं।