नई दिल्ली: 8 सितंबर 2026 (मंगलवार) का दिन सनातन धर्म में धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व रखता है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को पड़ने वाला यह दिन संकटमोचन हनुमान जी और मंगल ग्रह की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। सनातन परंपरा में किसी भी मांगलिक कार्य, नया व्यवसाय शुरू करने, यात्रा पर निकलने या धार्मिक अनुष्ठान से पहले पंचांग के माध्यम से शुभ मुहूर्त, नक्षत्र, योग और राहुकाल का विचार करना अति आवश्यक होता है।
तिथि, नक्षत्र और शुभ योग
8 सितंबर को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि रहेगी। नक्षत्रों की गणना के अनुसार इस दिन पुष्य नक्षत्र के उपरांत अश्लेषा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। पंचांगीय योगों की बात करें तो आज सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो धार्मिक कार्यों, मंत्र साधना और हनुमान चालीसा के पाठ के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन चंद्र देव अपनी स्वराशि कर्क में संचार करेंगे, जो मानसिक स्थिरता और कार्यों में सफलता प्रदान करने में सहायक होंगे।
सूर्योदय, सूर्यास्त और शुभ मुहूर्त
मंगलवार को पंचांगीय गणना के अनुसार सूर्योदय, सूर्यास्त और दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्तों का समय इस प्रकार रहेगा:
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सूर्योदय: सुबह 06:03 बजे
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सूर्यास्त: शाम 06:35 बजे
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चंद्रोदय: तड़के 03:18 बजे (9 सितंबर)
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चंद्रास्त: दोपहर 04:12 बजे
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:53 बजे से 12:43 बजे तक (दिन का सबसे शुभ समय, जिसमें नया कार्य प्रारंभ किया जा सकता है)
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अमृत काल: सुबह 06:45 बजे से 08:20 बजे तक
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विजय मुहूर्त: दोपहर 02:23 बजे से 03:13 बजे तक
राहुकाल, दिशाशूल और पूजन सलाह
मंगलवार के दिन राहुकाल दोपहर 03:00 बजे से शाम 04:33 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल की अशुभ अवधि के दौरान किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने, मांगलिक अनुष्ठान या बड़े वित्तीय लेन-देन से बचना चाहिए।
मंगलवार को उत्तर दिशा में दिशाशूल माना जाता है, इसलिए इस दिशा में लंबी यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि उत्तर दिशा में यात्रा करना अत्यंत आवश्यक हो, तो घर से निकलने से पहले थोड़ा सा गुड़ या सौंफ खाकर और श्री हनुमान जी का ध्यान करके ही प्रस्थान करें। इस दिन हनुमान जी को लाल पुष्प और सिंदूर अर्पित करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।