शंकराचार्य आश्रम में चातुर्मास्य व्रतानुष्ठान का शुभारंभ, 26 सितंबर तक होंगे धार्मिक अनुष्ठान
रायपुर। श्री जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम, बोरियाकला में परम पूज्य 1008 यतिप्रवर दण्डी स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ जी महाराज के द्वितीय चातुर्मास्य व्रतानुष्ठान का शुभारंभ बुधवार, 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हुआ। चातुर्मास्य का यह धार्मिक आयोजन 26 सितंबर 2026 तक चलेगा, जिसमें नियमित वेदपाठ, पूजन, श्रीचक्रार्चन, पार्थिव शिवलिंग निर्माण और रुद्राभिषेक सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।
चातुर्मास्य व्रतानुष्ठान का आयोजन भगवती राजराजेश्वरी महात्रिपुर सुन्दरी ललिता प्रेमाम्बा महारानी एवं ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज की कृपा, द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती महाराज तथा ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती महाराज के आशीर्वाद और ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द महाराज के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

गुरु पूर्णिमा पर व्यास पूजन के साथ लिया चातुर्मास्य का संकल्प
आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर चातुर्मास्य व्रतानुष्ठान का विधिवत संकल्प लिया गया और व्यास पूजन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने आश्रम पहुंचकर पूजा-अर्चना की और धर्मलाभ प्राप्त किया।
आश्रम में चातुर्मास्य अवधि के दौरान प्रतिदिन सुबह 8:30 से 9:30 बजे तक वेदपाठ किया जाएगा। इसके साथ ही सुबह और शाम भगवती राजराजेश्वरी महात्रिपुर सुन्दरी ललिता प्रेमाम्बा महारानी का पूजन एवं श्रीचक्रार्चन होगा।
श्रावण मास में प्रतिदिन होगा रुद्राभिषेक
श्रावण मास के दौरान प्रतिदिन सुबह 10 बजे पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया जाएगा, जिसके बाद सुबह 11 बजे रुद्राभिषेक होगा। शाम को भगवान सिद्धेश्वर महादेव का भी वैदिक विधि-विधान से रुद्राभिषेक किया जाएगा।
चातुर्मास्य के दौरान श्रावण सोम प्रदोष, हरियाली अमावस्या, नाग पंचमी, गोस्वामी तुलसीदास जयंती, श्रावणी उपाकर्म, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, हरितालिका व्रत, गणेशोत्सव और अनंत चतुर्दशी सहित कई पर्वों पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इसके अलावा स्वामी करपात्री जी की जयंती, ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती महाराज एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर स्वामी सदानन्द सरस्वती महाराज के वर्धन्ती दिवस तथा ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज की जयंती पर भी विशेष आयोजन होंगे।
26 सितंबर को होगा चातुर्मास्य का समापन
करीब दो महीने तक चलने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान का समापन 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा के अवसर पर पूर्णिमा सीमोल्लंघन के साथ होगा। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से चातुर्मास्य के दौरान आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से आश्रम कार्यालय को आगमन की जानकारी कम से कम दो दिन पहले देने की अपील की गई है, ताकि आवश्यक व्यवस्थाएं की जा सकें।
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