पेशाब में खून दिखना हो सकता है किडनी कैंसर का संकेत, विशेषज्ञों ने समय पर जांच कराने की दी सलाह
रायपुर। विश्व किडनी कैंसर दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने लोगों को आगाह करते हुए कहा है कि पेशाब में खून आना या रक्त दिखाई देना कभी भी सामान्य लक्षण नहीं माना जाना चाहिए। यह किडनी कैंसर समेत मूत्र मार्ग की कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है। नारायणा एमएमआई हॉस्पिटल रायपुर के सीनियर कंसल्टेंट एवं क्लिनिकल लीड (नेफ्रोलॉजी) डॉ. सुनील धर्मानी ने लोगों से ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने और तुरंत चिकित्सकीय जांच कराने की अपील की है।
डॉ. धर्मानी ने बताया कि चिकित्सकीय भाषा में पेशाब में रक्त आने की स्थिति को "हेमट्यूरिया" कहा जाता है। कई बार यह बिना किसी दर्द या अन्य परेशानी के दिखाई देता है, जिसके कारण लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। हालांकि, यह किडनी कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार किडनी कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई मरीजों में बिना दर्द के पेशाब में खून आना ही बीमारी का पहला संकेत होता है। पेशाब का रंग गुलाबी, लाल या कोला जैसा दिखाई दे सकता है और कई बार रक्तस्राव रुक-रुक कर होता है, जिससे मरीज इसे अस्थायी समस्या समझकर अनदेखा कर देते हैं।
डॉ. धर्मानी ने बताया कि किडनी की पथरी या संक्रमण जैसी समस्याओं में आमतौर पर दर्द और जलन होती है, जबकि किडनी कैंसर केवल रक्तस्राव के रूप में भी सामने आ सकता है। कुछ मामलों में पीठ के एक हिस्से में लगातार दर्द, अचानक वजन कम होना, अत्यधिक थकान या पेट में गांठ जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं, लेकिन ये अक्सर बीमारी के उन्नत चरण में सामने आते हैं।
उन्होंने कहा कि मरीजों द्वारा समय पर डॉक्टर से परामर्श नहीं लेने के कारण कई बार बीमारी का पता देर से चलता है। कुछ लोग घरेलू उपचार या स्वयं दवा लेकर समस्या को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे कैंसर बढ़ता रहता है और उपचार जटिल हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के कारण अब किडनी कैंसर की पहचान पहले की तुलना में अधिक आसानी और शुरुआती अवस्था में संभव हो गई है। पेशाब की जांच, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचों के माध्यम से किडनी और मूत्र मार्ग की असामान्यताओं का पता लगाया जा सकता है।
डॉ. धर्मानी के अनुसार यदि किडनी कैंसर का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। वर्तमान में न्यूनतम चीरे वाली सर्जरी, रोबोटिक तकनीक, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक उपचार पद्धतियों ने मरीजों के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार किया है।
उन्होंने कहा कि पेशाब में खून आने की एक भी घटना को सामान्य नहीं समझना चाहिए। चाहे यह बिना दर्द के हो या केवल एक बार दिखाई दिया हो, इसकी चिकित्सकीय जांच आवश्यक है। जागरूकता, समय पर जांच और शीघ्र उपचार ही किडनी कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
विश्व किडनी कैंसर दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि शरीर के किसी भी चेतावनी संकेत को हल्के में न लें, क्योंकि समय पर उठाया गया एक छोटा कदम जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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