बस्तर के नक्सल मुक्त 50 गांवों को एक-एक करोड़
सुकमा और बीजापुर के 20-20 और नारायणपुर के 10 गांव शामिल
रायपुर (चैनल इंडिया)। राज्य सरकार ने माओवादी हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। गृहमंत्री और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने शुक्रवार को पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक में निर्देश दिए कि माओवादी हिंसा से जुड़े उन ‘गैर-गंभीर’ मामलों की कानूनी समीक्षा की जाए, जिनमें किसी की जान नहीं गई है। इन मामलों में बंद पात्र आरोपियों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इसके लिए कानून विभाग की मदद से अभियोजकों और वकीलों की एक विशेष टीम गठित की जाएगी, जो कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए मामलों को वापस लेने की संभावनाओं की जांच करेगी। ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ को 31 मार्च, 2026 को आधिकारिक रूप से सशस्त्र माओवादियों से मुक्त घोषित किया जा चुका है। इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रमुख सचिव निहारिका सिंह बारिक, सचिव नेहा चंपावत और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद सिन्हा सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सरकार ने माओवादी मुक्त हो चुके गांवों के विकास के लिए ‘खजाना’ खोल दिया है। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि जिन गांवों ने स्वयं को माओवादी हिंसा प्रभाव से मुक्त होने का प्रस्ताव पारित किया है, वहां प्रति गांव एक करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए जाएंगे। फिलहाल ऐसे 50 गांवों की पहचान की गई है, जिनमें सुकमा और बीजापुर के 20-20 और नारायणपुर के 10 गांव शामिल हैं। बैठक में तय किया गया कि स्वतंत्रता दिवस का संकल्प: माओवादी हिंसा मुक्त सभी गांवों में इस वर्ष 15 अगस्त को ध्वजारोहण किया जाएगा। नक्सल माओवादी हिंसा से प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राथमिकता से पक्के घर उपलब्ध कराए जाएंगे। माओवादी हिंसा में बलिदान हुए सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों की याद में संबंधित स्थानों पर सामुदायिक स्मारक बनाए जाएंगे। साथ ही, पीडि़त परिवारों को मिलने वाली सरकारी सहायता बिना देरी के सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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