रिसर्च में बड़ा खुलासा: मध्यम वर्ग की महिलाएं भी बढ़ रही हैं अपराध की ओर, बदलती जीवनशैली बनी बड़ी वजह
रायपुर। अपराध को लंबे समय तक पुरुष प्रधान गतिविधि माना जाता रहा है, लेकिन बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश में महिलाओं की अपराधों में भागीदारी भी बढ़ती दिखाई दे रही है। छत्तीसगढ़ पुलिस की एक महिला अधिकारी द्वारा किए गए शोध में महिलाओं के अपराध की ओर बढ़ते रुझान को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। शोध के अनुसार, अब केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ही नहीं, बल्कि मध्यम वर्ग की महिलाएं भी विभिन्न प्रकार के अपराधों में शामिल हो रही हैं।
यह अध्ययन पुलिस मुख्यालय रायपुर में सीआईडी विभाग में पदस्थ उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) डॉ. रोशनी वासनिक द्वारा किया गया है। उन्होंने समाजशास्त्र विषय में पीएचडी के लिए किए गए अपने शोध में महिलाओं के अपराध से जुड़ने के सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक और मनोवैज्ञानिक कारणों का विस्तृत विश्लेषण किया है।
बदलती जीवनशैली और बढ़ती महत्वाकांक्षाएं
शोध में सामने आया है कि आधुनिक जीवनशैली, सामाजिक प्रतिष्ठा की चाह, आर्थिक दबाव और त्वरित सफलता की मानसिकता महिलाओं को अपराध की ओर आकर्षित कर रही है। पहले जहां गरीबी को अपराध का प्रमुख कारण माना जाता था, वहीं अब सामाजिक प्रतिस्पर्धा और दिखावटी जीवनशैली भी अपराध की महत्वपूर्ण वजह बनती जा रही है।
अध्ययन के मुताबिक, महंगे जीवन स्तर को बनाए रखने की चाह, सोशल मीडिया का प्रभाव और आर्थिक अपेक्षाओं का बढ़ता दबाव कई महिलाओं को गलत रास्ता अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
साइबर अपराधों में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी
शोध में यह भी पाया गया कि साइबर अपराध के मामलों में महिलाओं की भागीदारी पहले की तुलना में बढ़ी है। ऑनलाइन ठगी, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाना, डिजिटल ब्लैकमेलिंग और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे मामलों में महिला आरोपियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
इसके अलावा मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, आर्थिक अपराध, ब्लैकमेलिंग और अन्य संगठित अपराधों में भी महिलाओं की भूमिका सामने आने लगी है।
800 महिलाओं पर आधारित अध्ययन
डॉ. रोशनी वासनिक ने अपने शोध के दौरान रायपुर जिले की 800 महिलाओं से बातचीत की। अध्ययन में व्यक्तिगत साक्षात्कार, गहन चर्चाएं और फोकस ग्रुप डिस्कशन को शामिल किया गया। शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि महिलाओं का अपराध से जुड़ाव केवल व्यक्तिगत सोच या स्वभाव का परिणाम नहीं है, बल्कि उनके जीवन में मौजूद सामाजिक संघर्ष, आर्थिक चुनौतियां, पारिवारिक तनाव और प्रतिकूल परिस्थितियां भी इसके पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
घरेलू तनाव और मानसिक स्वास्थ्य भी अहम कारण
अध्ययन में घरेलू कलह, बेरोजगारी, आर्थिक असुरक्षा, शिक्षा की कमी और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भी अपराध की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले प्रमुख कारकों के रूप में चिन्हित किया गया है। कई मामलों में महिलाएं पहले स्वयं शोषण या अपराध का शिकार होती हैं और बाद में परिस्थितियों के दबाव में अपराध के रास्ते पर पहुंच जाती हैं।
केवल सजा नहीं, सामाजिक समाधान भी जरूरी
डीएसपी डॉ. रोशनी वासनिक का मानना है कि महिलाओं में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति को रोकने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई या दंडात्मक व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। इसके लिए शिक्षा, रोजगार, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, परिवारों में बेहतर संवाद और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण से अपराध की संभावनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही समाज और प्रशासन को मिलकर ऐसे वातावरण का निर्माण करना होगा, जहां महिलाएं चुनौतियों का सामना सकारात्मक तरीके से कर सकें।
यह शोध बदलते सामाजिक परिदृश्य में महिलाओं की भूमिका और अपराध के नए आयामों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है।

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