जन्मदिन पर विशेषः पहले प्रयास में बने आईएएस, अब संभाल रहे प्रदेश का खजाना

जन्मदिन पर विशेषः पहले प्रयास में बने आईएएस, अब संभाल रहे प्रदेश का खजाना

ओमप्रकाश चौधरी: संघर्ष, प्रशासनिक सेवा और राजनीति में सफलता की मिसाल 

जन्मदिनः 02 जून

छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता ओपी चौधरी आज प्रदेश की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में स्थान बनाने और फिर राजनीति में अपनी अलग पहचान स्थापित करने तक का उनका सफर संघर्ष, मेहनत और सफलता की प्रेरक कहानी माना जाता है।

ओपी चौधरी का जन्म दो जून 1981 को रायगढ़ जिले के खरसिया क्षेत्र में हुआ था। उनके पिता दीनानाथ चौधरी शिक्षक थे, लेकिन जब ओपी महज पांच वर्ष के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद उनकी परवरिश माता कौशल्या बाई चौधरी ने कठिन परिस्थितियों में की। शुरुआती शिक्षा गांव में हुई, जबकि आगे की पढ़ाई उन्होंने सरकारी स्कूलों में पूरी की।

स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने पीईएटी का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। हालांकि उनका लक्ष्य शुरू से ही भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाना था। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तैयारी शुरू की और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली। साल 2005 बैच के आईएएस अधिकारी बने ओपी चौधरी को 2006 में कोरबा में सहायक कलेक्टर के रूप में पहली नियुक्ति मिली। इसके बाद उन्होंने रायपुर में एसडीएम, जांजगीर-चांपा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), रायपुर नगर निगम आयुक्त और दंतेवाड़ा कलेक्टर सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। बाद में उन्होंने रायपुर कलेक्टर के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।

दंतेवाड़ा में कलेक्टर रहते हुए उन्होंने शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय पहल कीं। आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष कोचिंग सुविधा उपलब्ध कराई गई। साथ ही आवासीय विद्यालयों के विस्तार और शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए कई नवाचार किए गए। गीदम क्षेत्र को शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रदेश में युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किए गए ‘लाइवलीहुड कॉलेज’ मॉडल को विकसित करने का श्रेय भी ओपी चौधरी को दिया जाता है। बाद में इस मॉडल को राज्य स्तर पर लागू किया गया। प्रशासनिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें वर्ष 2011-12 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद ओपी चौधरी ने वर्ष 2018 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा। उसी वर्ष भाजपा ने उन्हें खरसिया विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, हालांकि उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी। पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने के दौरान उनकी पहचान भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के करीब नेताओं में बनी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें रायगढ़ विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी और तत्कालीन विधायक प्रकाश नायक को 64 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराकर विधानसभा में प्रवेश किया।

विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में भी ओपी चौधरी का नाम चर्चा में रहा। हालांकि पार्टी ने उन्हें राज्य सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ सरकार में वित्त मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं और प्रदेश की आर्थिक नीतियों एवं विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।