पैरों में सुन्नपन और झुनझुनी को न करें नजरअंदाज: यह 'पेरिफेरल न्यूरोपैथी' का हो सकता है संकेत; जानें कारण और बचाव

पैरों में सुन्नपन और झुनझुनी को न करें नजरअंदाज: यह 'पेरिफेरल न्यूरोपैथी' का हो सकता है संकेत; जानें कारण और बचाव
नई दिल्ली: अक्सर लोग पैरों में झुनझुनी (Tingling) या सुन्नपन (Numbness) होने पर इसे सामान्य थकावट या लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने का परिणाम मानकर टाल देते हैं। हालांकि, यदि यह समस्या बार-बार हो रही है, तो यह 'पेरिफेरल न्यूरोपैथी' (Peripheral Neuropathy) नामक तंत्रिका विकार (Nerve Disorder) का शुरुआती लक्षण हो सकती है। समय पर इसकी पहचान और इलाज न होने पर यह नसों को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है।

पेरिफेरल न्यूरोपैथी के प्रमुख लक्षण
  • पैरों में सुई चुभने जैसा अहसास: पैर के तलवों और उंगलियों में चींटियां रेंगने या सुई चुभने जैसी झुनझुनी होना।
  • संवेदनहीनता (Numbness): पैरों का पूरी तरह सुन्न हो जाना, जिससे गर्म, ठंडा या स्पर्श ठीक से महसूस न होना।
  • तेज जलन और दर्द: रात के समय पैरों में अत्यधिक जलन होना या बिजली के झटके जैसा तीखा दर्द महसूस होना।
  • संतुलन खोना: नसों के कमजोर होने से चलते समय पैर डगमगाना और शरीर का संतुलन बनाने में दिक्कत आना।
  • मांसपेशियों में कमजोरी: पैरों की मांसपेशियां कमजोर होना, जिससे जूते-चप्पल पहनने या सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होना।
क्यों होती है यह समस्या? (मुख्य कारण)
  • अनियंत्रित डायबिटीज (Diabetic Neuropathy): हाई ब्लड शुगर पेरिफेरल न्यूरोपैथी का सबसे बड़ा कारण है। लंबे समय तक शुगर नियंत्रित न रहने से पैर की नसें क्षतिग्रस्त होने लगती हैं।
  • विटामिन बी12 की कमी: शरीर में विटामिन B1, B6, B12 और E जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की कमी से तंत्रिका तंत्र कमजोर हो जाता है।
  • शराब और धूम्रपान का सेवन: अत्यधिक शराब और टॉक्सिन्स का सेवन नसों के स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर डालता है।
  • ऑटोइम्यून बीमारियां: लुपस, रूमेटाइड आर्थराइटिस या कुछ संक्रमण भी शरीर की नसों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • दवाओं के दुष्प्रभाव: कैंसर की कीमोथेरेपी या कुछ लंबी चलने वाली दवाओं के साइड इफेक्ट्स से भी नसों में खराबी आती है।
बचाव और राहत के उपाय
  • ब्लड शुगर नियंत्रित रखें: डायबिटीज के मरीज नियमित रूप से अपनी शुगर जांचें और उसे नियंत्रित रखें।
  • पोषक आहार लें: अपनी डाइट में दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियां, फल और विटामिन B12 से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें।
  • नियमित व्यायाम और वॉक: रोजाना हल्का व्यायाम या पैदल चलने से पैरों में रक्त संचार (Blood Circulation) बेहतर होता है।
  • सही फुटवियर चुनें: आरामदायक, नरम सोल वाले और सही नाप के जूते पहनें ताकि पैरों में किसी प्रकार की चोट न लगे।
यदि पैरों में लगातार सुन्नपन या जलन बनी हुई है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत फिजिशियन या न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें।