अजय चंद्राकर, सुनील सोनी और राजेश मूणत ने मंत्री के किया निरुत्तर
रायपुर (चैनल इंडिया)। राजधानी रायपुर में 24 घण्टे पेयजल उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार के पास कोई योजना नहीं है। विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन आज प्रश्नकाल में सत्तापक्ष के विधायक अजय चंद्राकर, सुनील सोनी और राजेश मूणत ने राजधानी की पेयजल समस्या को लेकर सवालों की बौछार कर दी। विभागीय मंत्री अरुण साव ने जवाब देने की कोशिश की परंतु वे यह नहीं बता पाए कि राजधानीवासियों को 24 घण्टे पेयजल कब तक मिल पाएगा।
प्रश्नकाल में राजधानी की पेयजल समस्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में रायपुर से अधिक टैंकर किसी भी शहर में नहीं चलते हैं। उन्होंने जानना चाहा कि नगर निगम रायपुर में पेयजल की व्यवस्था किस स्तर के अधिकारी के जिम्मे हैं। उन्होंने सरकार के इस जवाब में भी आपत्ति की कि राजधानी की पेयजल व्यवस्था का संचालन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग के द्वारा की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम रायपुर में पेयजल की व्यवस्था की जिम्मेदारी किसी भी विशेषज्ञ अधिकारी के पास नहीं है।
भाजपा विधायक सुनील सोनी ने भी मंत्री साव को घेरते हुए कहा कि राजधानी में जहां-जहां टंकियां हैं, वहां टैंकर का संचालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अमृत मिशन योजना के तहत डबल पाइप लाइन बिछाने के बाद भी पूरे शहर में आधा-आधा घण्टे केवल दो बार पानी दिया जा रहा है। आज भी 1.21 लाख घरों में पानी नहीं पहुंच रहा है। भाजपा विधायक राजेश मूणत ने भी यह जानना चाहा कि राजधानी में 24 घण्टे पानी देने के लिए राज्य सरकार के पास क्या योजना है। उन्होंने यह भी कहा कि अमृत मिशन योजना के तहत 24 घंटे पानी देने के लिए राजधानी के तीन वार्डों तात्यापारा, चूड़ामणि तथा आत्मानंद वार्ड का चयन किया गया था पर आज तक वहां पानी नहीं मिल रहा है। राजेश मूणत ने यह भी कहा कि रायपुर में 90 हजार से अधिक अवैध नल कनेक्शन संचालित हैं, जिनको बंद करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
इन सभी सवालों के जवाब में मंत्री अरुण साव ने कहा कि पिछले ढाई साल में विभिन्न योजनाओं के तहत राजधानी को पेयजल के लिए 319 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि रायपुर में 45 टंकियां संचालित हैं। केवल फुंडहर व लाभांडी की टंकियां अब तक शुरू नहीं हो पाई हैं। इन्हें भी जल्द शुरू कराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि राजधानी के हर घर में 24 घण्टे पानी उपलब्ध हो और इसके लिए कार्ययोजना भी बनाई जा रही है।
वेदांता डायरेक्टर के खिलाफ एफआईआर पर हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट
मानसून सत्र में आज सक्ति जिले में हुए औद्योगिक हादसे का मुद्दा गरमाया रहा। वेदांता समूह के चेयरमैन व डायरेक्टर अनिल अग्रवाल के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर को लेकर सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट (बहिर्गमन) कर दिया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के विधायकों ने सक्ति प्लांट में हुए हादसे का मुद्दा उठाया। विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए सवाल किया कि इतिहास में पहली बार किसी हादसे के बाद कंपनी के शीर्ष डायरेक्टर (अनिल अग्रवाल) के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज की गई है। विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछाक्या आगे भी होने वाले हादसों में इसी तरह डायरेक्टर्स पर एफआईआर दर्ज होगी? या फिर यह कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों को निशाना बनाने के लिए की गई है? क्या उद्योगपति को दबाव में लेने या उनकी फैक्ट्री बिकवाने की नीयत से यह एफआईआर की गई है? सरकार के जवाब से असंतुष्ट और एफआईआर के पीछे 'राजनीतिक व व्यवसायिक दबावÓ का आरोप लगाते हुए विपक्ष के विधायकों ने सदन में जोरदार हंगामा किया। विपक्ष ने इस कार्रवाई को एकतरफा और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।