मोबाइल लत से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर मंडराया खतरा: बढ़ता स्क्रीन टाइम बना बड़ी चुनौती

मोबाइल लत से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर मंडराया खतरा: बढ़ता स्क्रीन टाइम बना बड़ी चुनौती
देहरादून: उत्तराखंड सहित देश भर में बच्चों के बीच स्मार्टफोन और डिजिटल उपकरणों की लत एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, अनियंत्रित स्क्रीन टाइम (Screen Time) के कारण बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर विपरीत असर पड़ रहा है। खेल-कूद की उम्र में घंटों स्क्रीन से चिपके रहने के कारण बच्चे अवसाद (Depression), चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और नींद न आने जैसी मानसिक समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं।

बच्चों के दिमाग और व्यवहार पर गहरा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि जब बच्चे लंबे समय तक मोबाइल पर गेम खेलते हैं या रील्स देखते हैं, तो उनके मस्तिष्क में डोपामाइन (Dopamine) का स्तर तेजी से बढ़ता है। इससे उन्हें तात्कालिक खुशी तो मिलती है, लेकिन स्क्रीन दूर होते ही वे उत्तेजित और आक्रामक होने लगते हैं।
  • चिड़चिड़ापन और आक्रामकता: मोबाइल छीनने या मना करने पर बच्चे जिद्दी हो जाते हैं और हिंसक व्यवहार करने लगते हैं।
  • एकाग्रता और पढ़ाई में गिरावट: अत्यधिक स्क्रीन उपयोग से बच्चों की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कमजोर हो रही है, जिससे पढ़ाई में उनका प्रदर्शन प्रभावित हो रहा है।
  • नींद का चक्र बाधित: देर रात तक स्क्रीन देखने से मेलाटोनिन हार्मोन का निर्माण प्रभावित होता है, जिससे बच्चों में अनिद्रा और सुबह थकान की समस्या बढ़ रही है।
  • सामाजिक अलगाव: बच्चे वास्तविक दुनिया और मैदानी खेलों से दूर होकर आभासी दुनिया (Virtual World) तक सीमित हो रहे हैं।

शारीरिक सेहत पर भी पड़ रहा बुरा प्रभाव

मानसिक तनाव के साथ-साथ स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों की शारीरिक सेहत भी बिगड़ रही है। कम उम्र में ही आंखों की रोशनी कमजोर होना (ड्राई आई सिंड्रोम), गर्दन व पीठ में दर्द और शारीरिक गतिविधि न होने से बच्चों में मोटापा (Obesity) तेजी से बढ़ रहा है।

अभिभावकों के लिए विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सलाह

चिकित्सकों और बाल विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने में माता-पिता की भूमिका सबसे अहम है:
  • स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें: 2 से 5 वर्ष के बच्चों के लिए अधिकतम 1 घंटा और उससे बड़े बच्चों के लिए 2 घंटे से अधिक स्क्रीन टाइम न दें।
  • नो-स्क्रीन जोन बनाएं: भोजन करते समय और सोने से कम से कम 1 घंटे पहले मोबाइल, टैब या टीवी का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करें।
  • मैदानी खेलों को बढ़ावा दें: बच्चों को शाम के समय पार्क में खेलने, साइकिल चलाने या अन्य शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें।
  • अभिभावक खुद मिसाल बनें: बच्चे माता-पिता के व्यवहार का अनुसरण करते हैं, इसलिए अभिभावक भी बच्चों के सामने मोबाइल का सीमित इस्तेमाल करें।