पंचांग 26 जुलाई : आषाढ़ शुक्ल द्वादशी पर जानें राहुकाल, शुभ मुहूर्त, नक्षत्र और रविवार का विशेष उपाय
नई दिल्ली : हिंदू पंचांग के अनुसार, 26 जुलाई 2026, दिन रविवार को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। रविवार का दिन भगवान सूर्यदेव की उपासना के लिए समर्पित होता है। साथ ही देवशयनी एकादशी के अगले दिन पड़ने वाली इस द्वादशी तिथि पर एकादशी व्रत का पारण भी किया जाता है, जिससे धार्मिक दृष्टि से आज का दिन अत्यंत पावन और फलदायी बन जाता है।
सनातन परंपरा में किसी भी नए कार्य की शुरुआत, धार्मिक अनुष्ठान या यात्रा से पहले दिन के शुभ और अशुभ मुहूर्तों का ज्ञान होना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं 26 जुलाई 2026 का संपूर्ण दैनिक पंचांग:
आज की तिथि और पंचांग विवरण
-
दिनांक: 26 जुलाई 2026, रविवार
-
विक्रम संवत: 2083, सिद्धार्थी
-
शक संवत: 1948, पराभव
-
अयन: दक्षिणायन
-
ऋतु: वर्षा ऋतु
-
मास (महीना): आषाढ़ मास
-
पक्ष: शुक्ल पक्ष
-
तिथि: द्वादशी तिथि (एकादशी व्रत पारण तिथि)
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
-
सूर्योदय: सुबह 05:40 बजे
-
सूर्यास्त: शाम 07:15 बजे
-
चन्द्रोदय: शाम 04:46 बजे
-
चन्द्रास्त: देर रात 03:05 बजे (27 जुलाई)
-
नक्षत्र: मूल नक्षत्र (अपराह्न तक), उसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र
-
योग: ब्रह्म योग (सुबह तक), तत्पश्चात इंद्र योग
-
चंद्र राशि: धनु राशि
-
सूर्य राशि: कर्क राशि
आज के शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
शास्त्रों के अनुसार शुभ मुहूर्त में किए गए कार्यों में सफलता प्राप्त होती है और सकारात्मक परिणाम मिलते हैं:
-
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:55 बजे तक।
-
ब्रह्म मुहूर्त: तड़के 04:16 बजे से 04:58 बजे तक।
-
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:44 बजे से दोपहर 03:39 बजे तक।
-
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:14 बजे से शाम 07:35 बजे तक।
-
एकादशी व्रत पारण समय: सुबह 05:40 बजे से सुबह 08:24 बजे के बीच।
आज का अशुभ समय (Inauspicious Timings)
राहुकाल और वर्ज्य मुहूर्तों के दौरान कोई भी नया या मांगलिक कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए:
-
राहुकाल: शाम 05:33 बजे से शाम 07:15 बजे तक (रविवार को इस समय में कोई भी शुभ कार्य न करें)।
-
यमगण्ड: दोपहर 12:28 बजे से दोपहर 02:10 बजे तक।
-
गुलिक काल: दोपहर 03:52 बजे से शाम 05:33 बजे तक।
-
दिशा शूल: पश्चिम दिशा (यदि पश्चिम दिशा में यात्रा आवश्यक हो, तो घर से पान का पत्ता या दलिया खाकर निकलें)।
रविवार व द्वादशी का विशेष उपाय:
आज सुबह स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल, थोड़ा सा गुड़, लाल चंदन और अक्षत मिलाकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का जप करें। एकादशी व्रत रखने वाले श्रद्धालु आज शुभ मुहूर्त में तुलसी दल और चरणामृत से व्रत का पारण करें। आज किसी जरूरतमंद को गेहूं, तांबा या गुड़ का दान करने से आरोग्य और समाज में मान-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।

admin 




