प्रदेश में अब नदी-आबादी और स्कूलों से दूर लगेंगे उद्योग
उद्योगों की स्थापना के लिए नए ‘साइटिंग क्राइटेरिया’
रायपुर (चैनल इंडिया)। छत्तीसगढ़ में अब उद्योग लगाने के लिए स्थान का चयन पहले की तुलना में अधिक सख्त नियमों के तहत करना होगा। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (सीईसीबी) ने उद्योगों की स्थापना के लिए नए ‘साइटिंग क्राइटेरिया’ (स्थान चयन मानदंड) अधिसूचित कर दिए हैं।
इसके तहत उद्योगों को नदियों, तालाबों, आबादी, स्कूलों, अस्पतालों, धार्मिक स्थलों, पुरातात्विक स्मारकों, आरक्षित वनों और इको-सेंसिटिव क्षेत्रों से न्यूनतम निर्धारित दूरी बनाए रखना अनिवार्य होगा। यह आदेश वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 तथा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रावधानों के तहत जारी किया गया है। इसका उद्देश्य उद्योगों के कारण पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पडऩे वाले प्रभाव को कम करना है।
नए मानदंडों से जल स्रोतों, आबादी और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के निकट प्रदूषणकारी उद्योग स्थापित करने पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। साथ ही उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया में स्थान चयन को लेकर स्पष्ट और एकरूप नियम लागू हो जाएंगे, जिससे भविष्य में पर्यावरणीय विवादों और जन-आपत्तियों को भी कम करने में मदद मिलने की संभावना है।
राजस्व अभिलेखों के अनुसार किसी भी सतही जल स्रोत (बाढ़ क्षेत्र, एचएफएल अथवा रेड लाइन) की सीमा से उद्योगों की न्यूनतम दूरी तय की गई है। रेड श्रेणी के उद्योग - 500 मीटर से अधिक दूरी। ऑरेंज श्रेणी के उद्योग : अपशिष्ट जल उत्पन्न करने वाले उद्योग- 75 मीटर से अधिक। अपशिष्ट जल उत्पन्न नहीं करने वाले उद्योग - 30 मीटर से अधिक। ग्रीन श्रेणी के उद्योग- 30 मीटर से अधिक दूरी।
रिहायशी क्षेत्रों, शैक्षणिक संस्थानों, पूजा स्थलों, पुरातात्विक स्मारकों, आरक्षित वनों तथा इको-सेंसिटिव क्षेत्रों से भी न्यूनतम दूरी निर्धारित की गई है। रेड श्रेणी-500 मीटर। ऑरेंज श्रेणी 200 मीटर। ग्रीन श्रेणी 100 मीटर। अधिसूचना में आरक्षित वन की अधिसूचित सीमा से सभी श्रेणी के उद्योगों के लिए न्यूनतम 100 मीटर दूरी अनिवार्य की गई है। यानी रेड, ऑरेंज और ग्रीन-तीनों श्रेणियों के उद्योगों पर यह समान रूप से लागू होगा।

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