धमनियों में छिपा खतरा: वैस्कुलर डिजीज के लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
रायपुर। पैरों में बार-बार दर्द या ऐंठन, पैर ठंडे रहना, त्वचा में बदलाव या ऐसा घाव जो लंबे समय तक ठीक न हो—इन लक्षणों को अक्सर लोग सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन ये वैस्कुलर डिजीज यानी रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारी के संकेत हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते इन लक्षणों की पहचान और जांच गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद कर सकती है।
एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर के एडल्ट कार्डियक सर्जरी एवं पीडियाट्रिक एंड कॉन्जेनिटल हार्ट सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. हरि कुमार पी.के. के अनुसार, वैस्कुलर डिजीज में शरीर के विभिन्न हिस्सों तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में संकुचन या रुकावट हो सकती है। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के दिखाई दे सकते हैं, लेकिन बीमारी बढ़ने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
पैरों में दर्द और ठंडापन हो सकता है संकेत
परिधीय धमनी रोग (Peripheral Artery Disease) में हाथ-पैरों की धमनियों में रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है। इसके कारण चलने पर पैरों में दर्द या ऐंठन, पैरों का असामान्य रूप से ठंडा रहना, त्वचा के रंग या बनावट में बदलाव और घाव का देर से भरना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन लक्षणों को उम्र बढ़ने, मौसम या सामान्य चोट से जोड़कर लंबे समय तक टालना सही नहीं है। लगातार बने रहने वाले लक्षणों की चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
डायबिटीज और धूम्रपान करने वालों में अधिक जोखिम
डायबिटीज से पीड़ित लोगों और धूम्रपान करने वालों में परिधीय धमनी रोग का जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे मामलों में रक्त संचार प्रभावित होने के साथ-साथ घाव भरने में भी परेशानी हो सकती है। गंभीर स्थिति में किसी अंग तक रक्त की आपूर्ति बहुत कम हो सकती है, जिससे आपातकालीन उपचार की जरूरत पड़ सकती है।
समय पर जांच से बीमारी की पहचान संभव
वैस्कुलर डिजीज की शुरुआती पहचान के लिए चिकित्सकीय जांच महत्वपूर्ण है। डॉक्टर मरीज के लक्षणों और जोखिम कारकों के आधार पर आवश्यक परीक्षण की सलाह दे सकते हैं। समय पर बीमारी का पता चलने पर जीवनशैली में बदलाव, दवाओं और अन्य उपचारों के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा सकती है।
वहीं, बीमारी के गंभीर स्तर पर पहुंचने के बाद उपचार अधिक जटिल हो सकता है। इसलिए खासकर जोखिम वाले लोगों को लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है।
डरने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत
वैस्कुलर डिजीज के मामले में जागरूकता और समय पर जांच अहम भूमिका निभा सकती है। पैरों में लगातार दर्द या ऐंठन, असामान्य ठंडापन, त्वचा में बदलाव या लंबे समय से न भरने वाले घाव जैसे संकेत दिखाई दें तो इसे सामान्य समस्या मानकर टालना उचित नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बीमारी की शुरुआती पहचान होने पर उपचार के विकल्प अधिक प्रभावी हो सकते हैं। इसलिए वैस्कुलर डिजीज से बचाव के लिए डर नहीं, बल्कि समय पर पहचान, चिकित्सकीय सलाह और नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी है।
admin




