आँखों की थकान, गले की खराश और पीठ की अकड़न से हैं परेशान? रोज सिर्फ 5 मिनट करें 'मत्स्यासन', मिलेंगे गजब के फायदे

आँखों की थकान, गले की खराश और पीठ की अकड़न से हैं परेशान? रोज सिर्फ 5 मिनट करें 'मत्स्यासन', मिलेंगे गजब के फायदे

नई दिल्ली : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और डेस्क जॉब की मजबूरी के कारण अधिकांश लोग शारीरिक समस्याओं से घिरे रहते हैं। घंटों कंप्यूटर के सामने बैठने से आँखों में थकान, गर्दन और पीठ में अकड़न होना अब एक आम बात हो गई है। इन सभी समस्याओं का एक बेहद आसान और प्रभावी समाधान योग में छिपा है - 'मत्स्यासन' (Matsyasana - Fish Pose)।

संस्कृत में 'मत्स्य' का अर्थ मछली होता है। इस आसन को करते समय शरीर की आकृति मछली जैसी बनती है, इसलिए इसे मत्स्यासन या 'फिश पोज' कहा जाता है। आइए जानते हैं इस आसन को करने के बेहतरीन फायदे और सही तरीका।

मत्स्यासन करने के चमत्कारी फायदे

  • आँखों की थकान और स्ट्रेन से राहत: लगातार स्क्रीन देखने से आँखों की मांसपेशियों पर जो दबाव बनता है, मत्स्यासन के नियमित अभ्यास से वह दूर होता है और आँखों की रोशनी में सुधार आता है।

  • पीठ, गर्दन और कंधों की अकड़न दूर करे: इस आसन को करते समय छाती और गर्दन पीछे की ओर खिंचती है। इससे रीढ़ की हड्डी (Spine) लचीली बनती है और कंधों व पीठ का दर्द गायब हो जाता है।

  • गले की खराश और थायराइड में मददगार: मत्स्यासन के दौरान गर्दन में आने वाले खिंचाव से थायराइड ग्रंथि उत्तेजित होती है। साथ ही, यह फेफड़ों को खोलता है, जिससे सांस लेने की क्षमता सुधरती है और गले की खराश या टॉन्सिल जैसी समस्याओं में आराम मिलता है।

  • तनाव और थकान को करे कम: यह आसन शरीर में रक्त के संचार (Blood Circulation) को सुधारता है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है और शरीर ऊर्जावान महसूस करता है।

मत्स्यासन करने की सही विधि (Step-by-Step Guide)

मत्स्यासन का पूरा लाभ उठाने के लिए इसे सही तरीके से करना बेहद जरूरी है:

  1. शुरुआती स्थिति: सबसे पहले फर्श पर योग मैट बिछाकर पीठ के बल सीधे लेट जाएं। आपके हाथ शरीर के बगल में और पैर सीधे होने चाहिए।

  2. हाथों की स्थिति: अब अपने दोनों हाथों को हिप्स (नितंबों) के नीचे इस तरह रखें कि हथेलियां जमीन की तरफ हों और कोहनियां एक-दूसरे के करीब रहें।

  3. छाती को उठाएं: सांस भरते हुए अपनी कोहनियों और हाथों पर दबाव बनाएं और छाती व कंधों को जमीन से ऊपर उठाएं। इस दौरान आपकी रीढ़ की हड्डी में एक कर्व (मेहराब) बनना चाहिए।

  4. सिर को पीछे झुकाएं: अपनी गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं और सिर के ऊपरी हिस्से (क्राउन) को जमीन से स्पर्श कराएं। ध्यान रहे कि शरीर का पूरा वजन सिर पर नहीं, बल्कि आपकी कोहनियों और हाथों पर होना चाहिए।

  5. सांसों पर ध्यान दें: इस अवस्था में सामान्य रूप से गहरी सांस लेते और छोड़ते रहें। अपनी क्षमता के अनुसार 30 से 60 सेकंड तक इसी मुद्रा में बने रहें।

  6. आसन से बाहर आएं: सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे सिर को सीधा करें और छाती को जमीन पर वापस ले आएं। हाथों को हिप्स के नीचे से निकालें और कुछ देर 'शवासन' में विश्राम करें।

सावधानियां: किन लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए?

यद्यपि यह आसन बेहद फायदेमंद है, लेकिन निम्नलिखित स्थितियों में इसे करने से बचना चाहिए:

  • यदि आपको हाई या लो ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) की गंभीर समस्या है।

  • यदि गर्दन में गंभीर चोट, स्लिप डिस्क या रीढ़ की हड्डी से जुड़ी कोई बड़ी बीमारी हो।

  • माइग्रेन या चक्कर आने (Vertigo) की शिकायत होने पर इसका अभ्यास न करें।

शुरुआती सुझाव: यदि आप पहली बार योग कर रहे हैं, तो पैरों को सीधे रखकर ही इसका अभ्यास करें। बाद में विशेषज्ञ की देखरेख में इसे 'पद्मासन' (पैरों को मोड़कर) की मुद्रा में भी किया जा सकता है।