"जिनका पुलिस वेरिफिकेशन नहीं वे कर रहे हैं अम्बेडकर अस्पताल की सुरक्षा व सफाई", धरम कौशक और अजय चंद्राकर ने मंत्री को घेरा

"जिनका पुलिस वेरिफिकेशन नहीं वे कर रहे हैं अम्बेडकर अस्पताल की सुरक्षा व सफाई", धरम कौशक और अजय चंद्राकर ने मंत्री को घेरा
चोरियों व मारपीट की घटनाओं पर जताई चिंता
प्लेसमेंट एजेंसी को संरक्षण देने का आरोप
रायपुर (चैनल इंडिया)। विधानसभा के मानसून सत्र में आज सत्तारूढ़ दल के सदस्यों ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि पुलिस वेरिफिकेशन कराए बिना प्रदेश के सबसे बड़े अम्बेडकर अस्पताल की सफाई और सुरक्षा कराई जा रही है। भाजपा सदस्यों ने स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल पर प्लेसमेंट एजेंसी को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस वेरिफिकेशन के बिना प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारी वहां अराजकता फैला रहे हैं। चोरियों की घटनाएं बढ़ रही हैं। मरीजों के परिजनों के साथ मारपीट व दुव्र्यवहार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। 
प्रश्नकाल में भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से प्लेटमेंट एजेंसी के माध्यम कर्मचारियों से काम तो कराया जा रहा है परंतु उनका पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया जा रहा है, जिससे लगातार घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कई वारदातों का ब्योरा देते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि विभागीय मंत्री का प्लेसमेंट एजेंसी को संरक्षण है। इसके बाद भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने यह जानना चाहा कि विभाग ने किन कामों के लिए प्लेसमेंट एजेंसी से कर्मचारी लेने के लिए वित्त विभाग से अनुमति ली है। 
भाजपा सदस्यों ने स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत निजी प्लेसमेंट एजेंसियों से नियुक्त सफाईकर्मी, सुरक्षा गार्ड व अन्य आउट सोर्सिंग स्टाफ के पुलिस सत्यापन की गंभीर लापरवाही को लेकर प्रश्न खड़े किए। सदस्यों ने ‘छत्तीसगढ़ निजी नियोजन अभिकरण अधिनियम, 2013’ के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए  सरकार को घेरा। सदस्यों ने सदन को अवगत कराया कि नियमों के मुताबिक किसी भी कामगार को तब तक नियुक्त नहीं किया जा सकता, जब तक पुलिस अधीक्षक स्तर से उसकी चरित्र प्रमाण-पत्र और पूर्ववृत्त की रिपोर्ट सत्यापित न हो जाए। धरमलाल कौशिक ने आरोप लगाया कि इस लापरवाही के कारण अस्पताल परिसर में मोबाइल, नकदी, सोने की बालियां चोरी, डिलीवरी के समय चोरी और पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार जैसी घटनाएं हुई हैं।
स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने सदन में जवाब देते हुए टेंडर दस्तावेजों की तकनीकी खामी स्वीकार की। उन्होंने कहा कि वर्तमान टेंडर दस्तावेजों में पुलिस सत्यापन न होने पर भुगतान रोकने का कोई सख्त प्रावधान नहीं था, इसलिए अप्रैल 2024 से भुगतान पर रोक नहीं लगाई जा सकी। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि भविष्य के सभी टेंडरों में पुलिस सत्यापन को अनिवार्य शर्त बनाया जाएगा।
गुजरात की प्रतिबंधित दवा कंपनी से टैबलेट खऱीदने पर मंत्री घिरे
कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने प्रतिबंधित कंपनी यूनिक्योर से दवाओं की खरीद को लेकर सवाल उठाया। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में विस्तृत जवाब देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ मेडिकेयर सर्विसेज कंपनी की खरीद प्रक्रिया में गुणवत्ता जांच के सख्त प्रावधान हैं और किसी भी प्रतिबंधित उत्पाद की आपूर्ति तुरंत रोक दी जाती है। मंत्री ने अवगत कराया कि क्रय-नियमों में पूर्व-खरीद जांच का कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद आपूर्तिकर्ता कंपनियां दवा भेजने से पहले अपने परीक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत करती हैं। यदि कोई सामग्री निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरती, तो उसे वितरित नहीं किया जाता।