50 हजार से अधिक शिकायतें, समाधान 10 फीसदी भी नहीं
रायपुर (चैनल इंडिया)। प्रदेश भर में इन दिनों बिजली उपभोक्ता भारी-भरकम और बढ़े हुए बिजली बिलों से त्रस्त हैं। रायपुर, भिलाई, बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर जैसे बड़े शहरों से बिजली बिलों में असमान्य वृद्धि की 50 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। शिकायतों की तुलना में समाधान की रफ्तार दस प्रतिशत भी नहीं है। जहां एक तरफ उपभोक्ता इस बढ़ी हुई राशि से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ विभागीय अधिकारी बढ़ती गर्मी और बिजली खपत का हवाला देकर इस असामान्य वृद्धि को सही ठहरा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं में असंतोष गहराता जा रहा है।
आम उपभोक्ताओं का कहना है कि जिन घरों का मासिक बिजली बिल पहले 400 से 500 रुपये के बीच आता था, उन्हें अब सीधे 2,000 से 2,500 रुपये तक के बिल थमाए जा रहे हैं। इसी तरह स्मार्ट मीटर को लेकर भी बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। टिकरापारा और सेजबहार के कई उपभोक्ताओं ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनका बिल तीन से चार गुना तक बढ़ गया है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि लगातार बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या के बावजूद बिलों में यह बेतहाशा बढ़ोतरी समझ से परे है। उपभोक्ता अब इस मामले में निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। सीएसपीडीसीएल के एमडी भीम सिंह कंवर का कहना है कि गर्मी में बिजली की खपत बढऩे के कारण बिल अधिक आया होगा। किसी उपभोक्ता को शिकायत है तो वे शहरी केंद्र के अलावा कंपनी मुख्यालय में भी इसकी शिकायत कर सकते है। प्रत्येक शिकायतों का समाधान प्राथमिकता के साथ किया जाएगा।
इस मुद्दे पर सियासत भी गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने सरकार और बिजली कंपनी पर हमला बोलते हुए कहा कि जनता पहले से ही महंगी बिजली और अघोषित कटौती से परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली एप’ के माध्यम से उपभोक्ताओं से अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है। उन्होंने मांग की है कि बिजली कंपनी उपभोक्ताओं से केवल एक्चुअल रीडिंग बिल के आधार पर ही भुगतान ले और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।