थैलेसीमिया के साइलेंट कैरियर बन रहे बड़ा खतरा: विवाह-पूर्व जांच से बच सकती हैं आने वाली पीढ़ियां

थैलेसीमिया के साइलेंट कैरियर बन रहे बड़ा खतरा: विवाह-पूर्व जांच से बच सकती हैं आने वाली पीढ़ियां

रायपुर। भारत में थैलेसीमिया तेजी से एक गंभीर आनुवंशिक बीमारी के रूप में सामने आ रहा है। चिंताजनक बात यह है कि लाखों लोग इस बीमारी के साइलेंट कैरियर हैं, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं होती। विशेषज्ञों का कहना है कि विवाह-पूर्व जांच के जरिए इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है।

नारायणा एमएमआई हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट जनरल मेडिसिन डॉ. मुकेश कुमार शर्मा के अनुसार, कई लोग थैलेसीमिया ट्रेट के कैरियर होते हैं, लेकिन उनमें किसी प्रकार के लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे लोग सामान्य जीवन जीते हैं और अनजाने में यह जीन अपनी अगली पीढ़ी तक पहुंचा देते हैं। समस्या तब गंभीर हो जाती है जब दो कैरियर विवाह करते हैं और उनके यहां थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित बच्चे का जन्म होता है।

साधारण जांच से चल सकता है पता

विशेषज्ञों के मुताबिक, विवाह-पूर्व एक सामान्य रक्त जांच के जरिए यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति थैलेसीमिया का कैरियर है या नहीं। यदि दोनों साथी कैरियर पाए जाते हैं, तो वे परिवार शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेकर भविष्य के जोखिम को समझ सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह जांच विवाह रोकने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाले गंभीर कष्ट और परेशानियों को रोकने के लिए जरूरी है।

हर गर्भावस्था में 25% खतरा

डॉ. शर्मा ने बताया कि यदि पति-पत्नी दोनों थैलेसीमिया कैरियर हों, तो हर गर्भावस्था में 25 प्रतिशत संभावना रहती है कि बच्चा थैलेसीमिया मेजर से प्रभावित होगा। ऐसे बच्चों को जीवनभर नियमित रक्त चढ़ाने, बार-बार अस्पताल जाने और लगातार इलाज की जरूरत पड़ती है। इससे परिवार पर मानसिक, शारीरिक और आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।

जागरूकता की कमी बन रही बड़ी समस्या

विशेषज्ञों का कहना है कि देश में थैलेसीमिया को लेकर जागरूकता अब भी काफी कम है। अधिकांश परिवारों को बीमारी की जानकारी तब मिलती है, जब उनका बच्चा इससे प्रभावित होकर जन्म लेता है। ऐसे में विवाह-पूर्व जांच लोगों को समय रहते जागरूक बनाती है और उन्हें जिम्मेदारी के साथ परिवार नियोजन का अवसर देती है।

सस्ती और प्रभावी रोकथाम

डॉक्टरों के अनुसार, थैलेसीमिया की विवाह-पूर्व जांच एक सरल, सस्ती और प्रभावी रोकथाम उपाय है। इसे नियमित प्री-मैरिटल हेल्थ चेकअप का हिस्सा बनाया जाए तो गंभीर थैलेसीमिया से प्रभावित बच्चों की संख्या में कमी लाई जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता बनने से पहले की गई एक छोटी-सी जांच आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित कर सकती है और परिवारों को आजीवन कठिनाइयों से बचा सकती है।