रायपुर में जन्माष्टमी पर बारिश के आसार: मौसम विभाग का अनुमान; दही-हांडी और मटकी फोड़ कार्यक्रमों पर पड़ सकता है असर

रायपुर में जन्माष्टमी पर बारिश के आसार: मौसम विभाग का अनुमान; दही-हांडी और मटकी फोड़ कार्यक्रमों पर पड़ सकता है असर
रायपुर: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर आज राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला रहेगा। मौसम केंद्र रायपुर ने जन्मोत्सव के इस विशेष अवसर पर रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में मध्यम से भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। दिनभर छाए रहने वाले बादलों और हल्की से मध्यम वर्षा से तापमान में गिरावट आएगी, जिससे मौसम तो सुहावना रहेगा, लेकिन शाम और रात को होने वाले धार्मिक आयोजनों में बारिश की वजह से खलल पड़ सकता है।

रायपुर और आसपास के जिलों का पूर्वानुमान

मौसम विभाग के अनुसार, रायपुर, दुर्ग, भिलाई और बलौदाबाजार समेत मध्य छत्तीसगढ़ के जिलों में सुबह से ही आसमान में घने बादल छाए रहेंगे। दोपहर बाद और विशेष रूप से शाम/रात के समय तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश के बौछारें गिर सकती हैं। चूंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मध्यरात्रि में मनाया जाता है, इसलिए रात 11 से 12 बजे के दौरान भी छिटपुट बारिश या तेज बौछारों की आशंका बनी हुई है।

मानसूनी तंत्र का असर

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ओडिशा तट और उससे लगे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने चक्रवाती घेरे के कारण राज्य में प्रचुर मात्रा में नमी आ रही है। इस मानसूनी तंत्र के प्रभाव से रायपुर संभाग के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। बारिश और ठंडी हवाओं के चलने से पिछले कुछ दिनों से जारी उमस और गर्मी से लोगों को राहत मिलेगी।

जन्माष्टमी आयोजनों पर प्रभाव और मुख्य बिंदु

  • समारोहों पर बारिश का साया: मटकी फोड़ (दही-हांडी), झांकियों और मंदिरों में दर्शन के लिए निकलने वाले श्रद्धालु बारिश से प्रभावित हो सकते हैं।
  • आयोजकों को सलाह: विभिन्न समितियों और मंदिर प्रबंधकों को सलाह दी गई है कि खुले में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए वाटरप्रूफ पंडालों और बिजली के सुरक्षित इंतजाम रखें।
  • सड़क सुरक्षा और यातायात: बारिश के कारण सड़कों पर फिसलन और जलभराव हो सकता है, इसलिए मंदिरों व झांकियों के दर्शन के लिए निकलने वाले लोग वाहन धीमी गति से चलाएं।
  • सुरक्षा निर्देश: तेज आकाशीय बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों, लोहे के बड़े स्ट्रक्चरों या पेड़ों के नीचे शरण न लें।