गजेंद्र यादव : छात्र राजनीति से शिखर तक का सफर 

गजेंद्र यादव : छात्र राजनीति से शिखर तक का सफर 

जन्मदिन पर विशेष: 15 जून 

रायपुर। गजेंद्र यादव का जन्म वर्ष 15 जून 1978 में हुआ था। उनके पिता बिसराराम यादव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रांत कार्यवाह रहे हैं। पारिवारिक पृष्ठभूमि और संगठनात्मक माहौल के कारण गजेंद्र यादव की राजनीतिक सोच और नेतृत्व क्षमता प्रारंभ से ही विकसित हुई। उन्होंने वर्ष 2003 में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री प्राप्त की। कृषि और व्यवसाय से जुड़े परिवार से आने वाले गजेंद्र यादव ने सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। 

दुर्ग विधानसभा क्षेत्र से विधायक गजेंद्र यादव ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन विधायक अरुण वोरा को 48,697 मतों के भारी अंतर से हराया। इस जीत के साथ उन्होंने दुर्ग सीट पर लंबे समय से कायम कांग्रेस के वर्चस्व को समाप्त कर दिया, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा के परिवार का मजबूत गढ़ माना जाता था।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने स्थानीय स्तर से की। वे दुर्ग नगर निगम में पार्षद रह चुके हैं और संगठन में लगातार सक्रिय भूमिका निभाते हुए भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष बने। वर्ष 2023 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और पहली ही कोशिश में बड़ी जीत हासिल कर विधायक बने फिर उन्हें छत्तीसगढ़ का शिक्षा मंत्री बनाया गया।  गजेंद्र यादव की पहचान एक मिलनसार, सहज और जनता के बीच रहने वाले नेता के रूप में बनी है। चुनाव के दौरान उन्होंने लगातार जनसंपर्क अभियान चलाकर कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाई। उनकी साफ-सुथरी छवि और आम लोगों से सीधा संवाद उनकी लोकप्रियता का प्रमुख कारण रहा। दूसरी ओर कांग्रेस संगठन में आंतरिक मतभेद और परिवारवाद के आरोपों ने भी भाजपा को राजनीतिक लाभ पहुंचाया।

उनकी जीत के पीछे भाजपा के मजबूत संगठन, आरएसएस के मार्गदर्शन और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रदेश में बदलाव की उम्मीद रखने वाली जनता ने भी उनका खुलकर समर्थन किया, जिसके चलते कांग्रेस का परंपरागत जनाधार कमजोर पड़ गया। आज गजेंद्र यादव प्रदेश की राजनीति में एक प्रभावशाली युवा चेहरे के रूप में स्थापित हुए और मंत्री बने।