पुरातत्व विभाग में संग्रहाध्यक्ष से बना दिया उपसंचालक, पदोन्नति पर अदालती आदेशों के उल्लंघन का आरोप

पुरातत्व विभाग में संग्रहाध्यक्ष से बना दिया उपसंचालक, पदोन्नति पर अदालती आदेशों के उल्लंघन का आरोप
उच्चस्तरीय जांच की मांग
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग में पदोन्नति को लेकर नया विवाद सामने आया है। विभाग की एक अधिकारी ने उपसंचालक पद पर हुई पदोन्नति की वैधता पर सवाल उठाते हुए विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है। मामले में नियमों की अनदेखी और न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता डॉ. दीप्ति गोस्वामी ने संचालक, पुरातत्व विभाग को सौंपे गए आवेदन में आरोप लगाया है कि प्रतापचंद पारख को वर्ष 2020 में संग्रहाध्यक्ष पद से सीधे उप संचालक पद पर पदोन्नत किया गया, जबकि इस संबंध में न्यायालय पहले ही आपत्तियां दर्ज कर चुका था। शिकायत में कहा गया है कि संबंधित मामले में न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों और स्थगन आदेश के बावजूद पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इसे न्यायिक आदेशों की अवमानना बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। आवेदन में विवादित पदोन्नति को तत्काल निरस्त करने के साथ-साथ पदोन्नति के आधार पर प्राप्त वेतन एवं अन्य वित्तीय लाभों की वसूली की मांग भी की गई है। इसके अलावा सेवानिवृत्ति लाभ और पेंशन संबंधी प्रक्रियाओं पर भी रोक लगाने का आग्रह किया गया है।

शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच किसी केंद्रीय अथवा राज्य स्तरीय स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पूरे सेवाकाल से जुड़े रिकॉर्ड और निर्णयों की गहन समीक्षा की जानी चाहिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत की प्रतिलिपि राज्यपाल, मुख्यमंत्री, संस्कृति मंत्री और मुख्य सचिव को भी भेजी गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग और राज्य सरकार इस शिकायत पर क्या रुख अपनाते हैं। पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर उठे इन सवालों के बाद पुरातत्व विभाग में प्रशासनिक हलचल तेज होने की संभावना है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच होती है, तो कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा हो सकता है।