शैक्षणिक सत्र शुरू होने में कुछ दिन शेष, अधर में छात्रावासों का मरम्मत कार्य
दंतेवाड़ा से राजू शर्मा की रिपोर्ट
दंतेवाड़ा। आदिवासी बाहुल्य दंतेवाड़ा जिले में आश्रम-छात्रावास मरम्मत के नाम पर भारी भर्राशाही चल रही है। शासन ने मानसून पूर्व आश्रमोंं के मरम्मत कार्य के लिए करोड़ो रूपए ट्राईवल विभाग को उपलब्ध करवाया था और समय पर आश्रमों के मरम्मत का निर्देश दिया था वहीं आदिवासी विकास विभाग की लापरवाही के चलते समय पर छात्रावासों का मरम्मत कार्य पूर्ण नहीं हो पाया ईधर नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होने में अब चंद रोज ही शेष रह गए हैं। इस शैक्षणिक सत्र छात्रों को टूटे फूटे, टपकटे छत के नीचे बदहाल आश्रम शालाओं में ही बैठकर पढ़ाई करना होगा।


गौरतलब है कि दंतेवाड़ा जिले के विभिन्न आश्रम छात्रावासों के मरम्मत कार्य के लिए आदिम जाति कल्याण विकास विभाग ने करीब डेढ़ करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की थी। जनवरी 2026 में ट्रायवल विभाग ने जिले के 12 छात्रावासों के मरम्मत कार्य का टेंडर जारी किया था। मानसून पूर्व मरम्मत कार्य पूर्ण किया जाना था। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद भी आधे से अधिक आश्रमों में मरम्मत का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है जबकि 5 आश्रमों के ठेकेदारों ने यह कहकर काम करने से मना कर दिया कि हमें इसमें घाटा होगा इसलिए काम कर पाना संभव नहीं होगा। अब विभाग पुन: इन आश्रमों का रिटेंडर करवा रहा है। ईधर शैक्षणिक सत्र शुरू होने में अब कुछ दिन ही शेष बचे हैं ऐसे में बड़ा सवाल यह कि टूटे फूटे और बदहाल आश्रम शालाओं में आदिवासी छात्र कैसे बैठकर पढ़ाई कर पाएंगे? समय पर आश्रमों के मरम्मत कार्य पूर्ण नहीं हो पाने के लिए पुरी तरह से आदिवासी विकास विभाग ही जिम्मेदार है। ऐसा माना जा रहा है कि विभागीय अधिकारी की लापरवाही एवं अकर्मण्य रवैये के चलते समय पर आश्रमों का मरम्मत कार्य नहीं हो पाया। ईधर ठेकेदारों ने भी जबरन बिलो में काम ले लिया और मरम्मत कार्य किए बिना ही कार्य छोड़ दिया। आदिवासी विकास विभाग की लापरवाही का भुगतान अब छात्रों को भुगतना पड़ेगा। ट्राईवल विभाग अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।


प्राप्त जानकारी के मुताबिक समलरू, बचेली, बांगापाल, रेोंजे एवं मथाड़ी छात्रावासों में जिन ठेकेदारों को मरम्मत कार्य का काम मिला था उन ठेकेदारों ने हाथ खड़े करते हुए काम करने से ही मना कर दिया। ज्ञात हुआ है कि इन आश्रमों का मरम्मत कार्य ठेकेदारों ने काफी बिलो दर में भरा था। आर्थिक नुकसान के डर से काम शुरू करने से पहले ही मैदान छोड़ दिया। ईधर जिन आश्रमों में काम चल भी रहा है उनमें बेहद घटिया स्तर का काम करवाया जा रहा है। प्राक्कलन के अनुसार काम नहीं किया जा रहा है। विभाग के इंजीनियर ने भी माना है कि आश्रमों में गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं हो रहा। हाल ही में पोंदुम बालक आश्रम की रिपोर्ट मिडिया में आई थी। विभाग ने भी माना था कि काम इस्टीमेट के हिसाब से नहीं हो रहा काम की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे थे। ठेकेदारों को नोटिस भी जारी किया गया था। बड़ा सवाल यह कि जिन आश्रमों में मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ है वहां अब बच्चे बारिश में कैसे बैठकर पढ़ाई कर पाएंगे। अधिकांश आश्रमों में छत से पानी रिसता है। दरवाजे खिड़किया भी टूटी पड़ी है ऐसे में बारिश के बौछार से पानी क्लास रूम के अंदर तक घुस आता है। विभाग ने रिटेंडर तो कर दिया मगर अब मरम्मत कार्य के लिए समय ही कहां बचा है। इन बच्चों को कहां बिठाकर मरम्मत कार्य करवाया जाएगा? समय पर कार्य न करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ विभाग ने क्या कारवाई किया है? इस संबंध में सहायक आयूक्त दंतेवाड़ा राजीव नाग से उनका पक्ष जानने उनसे संपर्क किया गया तो उनके द्वारा फोन रिसिव नहीं किया गया जिससे उनका पक्ष नहीं लिया जा सका। इसी माह 16 जून से शैक्षणिक सत्र की शुरूआत हो रही है।

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