रायपुर संसदीय क्षेत्र में विधायकों का हाल : जिले में 46 प्रतिशत काम अधूरे, 29 प्रतिशत शुरू ही नहीं हो पाए
रायपुर। रायपुर जिले की सातों विधानसभा क्षेत्रों में विधायक निधि से स्वीकृत विकास कार्यों की प्रगति को लेकर असमान तस्वीर सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले में बड़ी संख्या में विकास कार्य या तो अधूरे पड़े हैं या अब तक शुरू ही नहीं हो पाए हैं। ऐसे में विकास कार्यों की रफ्तार और उनकी निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, जिले में स्वीकृत कुल कार्यों में लगभग 46 प्रतिशत कार्य अधूरे हैं, जबकि करीब 29 प्रतिशत कार्यों की शुरुआत तक नहीं हो सकी है। इसके बावजूद निर्माण एजेंसियों को स्वीकृत राशि का 50 प्रतिशत से अधिक भुगतान किया जा चुका है। भुगतान और जमीनी स्तर पर कार्यों की प्रगति के बीच का यह अंतर प्रशासनिक व्यवस्था और मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े कर रहा है।

विधानसभावार स्थिति पर नजर डालें तो आरंग विधानसभा विकास कार्यों की पूर्णता के मामले में सबसे आगे दिखाई देती है। यहां 50 स्वीकृत कार्यों में से 23 कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि 19 कार्य निर्माणाधीन हैं और 8 कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाए हैं। इसके विपरीत रायपुर दक्षिण विधानसभा में स्वीकृत 143 कार्यों में से केवल 9 कार्य पूर्ण हुए हैं, जबकि बड़ी संख्या में कार्य लंबित बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि विकास कार्यों की प्रगति को लेकर यहां सबसे अधिक सवाल उठ रहे हैं।
रायपुर उत्तर विधानसभा में 59 कार्य स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से केवल 6 कार्य पूर्ण हो पाए हैं। 43 कार्य अधूरे हैं, जबकि 10 कार्यों की शुरुआत तक नहीं हुई है। इसी तरह रायपुर पश्चिम विधानसभा में 47 स्वीकृत कार्यों में से मात्र 2 कार्य पूरे हुए हैं। यहां 17 कार्य अधूरे हैं और 28 कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाए हैं। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में लगभग दो-दो करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने के बावजूद कार्यों की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है।
रायपुर ग्रामीण विधानसभा में 45 स्वीकृत कार्यों में से 5 कार्य पूर्ण हुए हैं, जबकि 32 कार्य अधूरे हैं और 8 कार्य प्रारंभ नहीं हो सके हैं। अभनपुर विधानसभा में 79 कार्य स्वीकृत किए गए, जिनमें 12 कार्य पूरे हुए हैं, जबकि अधिकांश कार्य अभी भी लंबित हैं। वहीं धरसींवा विधानसभा में 49 कार्यों में से 17 कार्य पूर्ण हुए हैं, 19 कार्य अधूरे हैं और 13 कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कों, सामुदायिक भवनों और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई विकास कार्य वर्षों से अधूरे पड़े हैं। निर्माण एजेंसियों की सुस्ती और अधिकारियों की कमजोर निगरानी के कारण परियोजनाओं की गति प्रभावित हो रही है। लोगों का मानना है कि लंबित कार्यों के लिए जिम्मेदारी तय कर समयबद्ध तरीके से उन्हें पूरा कराया जाना चाहिए, ताकि जनता को विकास कार्यों का वास्तविक लाभ मिल सके।

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