23 नवंबर को कालाष्टमी,नियम से पूजन-पाठ करने से भगवान काल भैरव होते हैं प्रसन्न: इंदुभवानंद महाराज

23 नवंबर को कालाष्टमी,नियम से पूजन-पाठ करने से भगवान काल भैरव होते हैं प्रसन्न: इंदुभवानंद महाराज

शत्रुओं पर विजय प्राप्ति और धन लाभ के लिए उत्तम फलदायी होती है कालाष्टमी

रायपुर। शंकराचार्य आश्रम रायपुर के प्रमुख डॉ. इंदुभवानंद महाराज ने कालाष्टमी अर्थात काल भैरव अष्टमी के व्रत,महत्व और लाभ की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मार्गशीर्ष कृष्णाष्टमी कालाष्टमी यानि मार्ग कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी या काल भैरव अष्टमी माना जाता है। 23 नवंबर शुक्रवार को काल भैरव अष्टमी का व्रत मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि मार्ग शीर्ष कृष्ण पक्ष सप्तमी शुक्रवार को 22 नवंबर  को रात को 9 ब्जकर 21 मिनट से प्रारंभ होकर दूसरे दिन शनिवार को रात को 10:24 बजे तक रहेगी। अतः काल भैरव अष्टमी का जो पूजन है वहाब23 नवंबर शनिवार को ही किया जाएगा। इस वर्ष बड़ा संयोग है, कल अष्टमी जो है वह शनिवार को पड़ रही है। साथ में मघा नक्षत्र पड़ रहा है, यह अति उत्तम योग है। जो काल अष्टमी शनिवार से युक्त होती है, यदि कोई व्यक्ति पूजन करता है,व्रत का पालन करता है, व्रत का नियम धारण करता है उसके सारे शत्रु नष्ट हो जाते हैं। शत्रुओं पर विजय प्राप्ति करने वाली है। जादू,टोना दोषों को दूर करने वाली है, ऋण मुक्ति पूर्वक धन के मार्ग को प्रशस्त करने वाली है। इस दिन व्रत रखकर काल भैरव भगवान का पूजन कर कर तीन अर्घ्य देकर रात्रि जागरण करना चाहिए। वास्तव में काल भैरव भगवान शंकर के अवतार माने जाते हैं उन्हीं का विग्रह माना जाता है।

महाराज जी ने कहा कि भगवान शंकर के ही स्वरूप माने जाते हैं।  काल भैरव में अर्थात भैरव में कोई भेद नहीं है। भैरव में तीन अक्षर है भ,र,व यानि विश्व की स्थिति, सृष्टि और संहार तीनों करने वाले भैरव कहलाते हैं। भ का मतलब है पूरे विश्व का जो भरण पोषण करें, र का मतलब है जो रमन करें अर्थात पूरे संसार में जो व्याप्त रूप से रहे, कण-कण में व्याप्त है और व का मतलब है  वमन जो सृष्टि का संहार कर स्वतः सृष्टि को प्रकट करें ।

महाराज जी ने कहा कि आज भी भगवान काल भैरव काशी में विराजमान है और वहां के कोतवाल माने जाते हैं। जिन लोगों को काशी में निवास करना रहता है वह काल भैरव भगवान का पहले दर्शन करते हैं तब उनको उस नगरी का निवास प्राप्त होता है। जो तीर्थ क्षेत्र काशी में जाकर पाप करते हैं उनको दंड देने का काम काल भैरव करते हैं, इसलिए यहां जाकर काल भैरव का दर्शन करना चाहिए। लाखों जन्मों के पाप भी काल भैरव के दर्शन करने मात्र से नष्ट हो जाते हैं। वैसे तो प्रत्येक कर्म की सिद्धि के लिए काल भैरव की आज्ञा लेना अत्यंत आवश्यक है इसलिए विधि है जिससे भगवान शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। उन्हें जलेबी का भी भोग लगाया जाता है। उससे भी भगवान प्रसन्न होते हैं और प्रसन्न होकर आपकी सारी मनोकामना पूर्ण कर देते हैं। शनिवार को उनका दिन माना जाता है  शनिवार को तेल अर्पण करने से भगवान भैरवनाथ प्रसन्न हो जाते हैं और सुखद संयोग है कि इस बार शनिवार को अष्टमी पड़ रही है।