नई दिल्ली/ रायपुर (एजेंसी)। देश के भौगोलिक और इको सिस्टम में मध्य भारत की भूमिका अहम मानी जाती है। हाल ही में लोकसभा में पेश हुए इण्डिया स्टेट ऑफ फारेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) 2023 के आंकड़े पर्यावरण प्रेमियों और नीति-निर्माताओं के लिए मिले-जुले संकेत लेकर आए हैं।
एक तरफ जहां छत्तीसगढ़ और राजस्थान ने अपने वन एवं वृक्ष आवरण में शानदार वृद्धि दर्ज की है, वहीं मध्यप्रदेश में हरियाली का दायरा घटने से चिंताएं बढ़ गई हैं। लोकसभा में राजस्थान के सीकर सांसद अमरा राम के सवाल के जवाब में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने देश में वनीकरण के राज्यवार आंकड़े जारी किए। ये आंकड़े भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) द्वारा सेटेलाइट इमेजरी और जमीनी सत्यापन के आधार पर तैयार किए गए हैं।
छत्तीसगढ़ में 683.62 वर्ग किमी और राजस्थान में 394.46 वर्ग किमी की बढ़ोतरी हुई। छत्तीसगढ़ ने वनीकरण के क्षेत्र में अपनी स्थिति सुधारी है। 2021 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ ने अपने वन और वृक्ष आवरण में 683.62 वर्ग किमी की बढ़ोतरी दर्ज की है। केंद्रीय विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एलके शर्मा के अनुसार, यह वृद्धि केवल पारंपरिक जंगलों के घनत्व का नतीजा नहीं है। मानसून के दौरान सामान्य से अधिक बारिश ने पौधों की जीवित रहने की दर को बढ़ाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पौधे लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि वनों के संरक्षण और रोपे गए पौधों की देखभाल ही पर्यावरण को स्थायी सुरक्षा दे सकती है। सरकार का कहना है कि कृषि वानिकी, सडक़ किनारे हुए पौधरोपण, शहरी ग्रीन क्षेत्रों और कैम्पा व मनरेगा के तहत चलाए गए अभियानों का हरियाली बढ़ाने में बड़ा योगदान है।
हरियाली बढ़ाने में छत्तीसगढ़ अव्वल
छत्तीसगढ़ ने वनीकरण के क्षेत्र में अपनी स्थिति सुधारी है। 2021 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ ने अपने वन और वृक्ष आवरण में 683.62 वर्ग किमी की बढ़ोतरी दर्ज की है।
2021 में कुल आवरण: 61,666.83 वर्ग किमी
2023 में कुल आवरण: 62,350.45 वर्ग किमी
परिवर्तन (वृद्धि): +683.62 वर्ग किमी